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Mantra Jap Karne Ki Vidhi And Niyam: मंत्र जाप करते समय इन बातों का रखें ध्यान? तभी पूरी हो सकेगी मनोकामना

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Thu, 27 Jun 2024 08:20 AM IST
सार

Mantra Jap Karne Ki Vidhi And Niyam: सनातन धर्म में कोई भी पूजा अनुष्ठान मंत्रों के बिना पूरा नहीं होता है। हर धार्मिक अनुष्ठान में मंत्रों का जाप जरूर किया जाता है। वै

Mantra Jap Karne Ki Vidhi And Niyam
Mantra Jap Karne Ki Vidhi And Niyam- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Mantra Jap Karne Ki Vidhi And Niyam: सनातन धर्म में कोई भी पूजा अनुष्ठान मंत्रों के बिना पूरा नहीं होता है। हर धार्मिक अनुष्ठान में मंत्रों का जाप जरूर किया जाता है। वैदिक काल से ही सनातन धर्म में मंत्रों के जाप और जाप की परंपरा रही है। धर्म शास्त्रों में मंत्र जाप का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ मंत्र जाप के कई वैज्ञानिक लाभ भी बताए गए हैं। भगवान को प्रसन्न करने के लिए मंत्र जाप करना सबसे अच्छा माना जाता है, लेकिन मंत्र जाप के बारे में पूरी जानकारी न होने के कारण हम कई गलतियां कर देते हैं, जिसके कारण हमें मंत्र जाप का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। अगर आप मंत्र जाप का पूरा लाभ प्राप्त करना चाहते हैं तो इसके नियमों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में।
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तीन प्रकार से होता है मंत्र जाप (There Are Three Types Of Mantra Chanting)

वाचिक जप- जब मंत्र का उच्चारण जोर से किया जाता है, तो वह मौखिक जप की श्रेणी में आता है।
उपांशु जप- जब मंत्र का उच्चारण जीभ और होठों से इस तरह किया जाता है कि केवल होठों में कंपन होता प्रतीत होता है और मंत्र को केवल व्यक्ति ही सुन सकता है, तो ऐसा जप उपांशु जप की श्रेणी में आता है।
मानसिक जप- जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह जप केवल अंतर्मन से किया जाता है। इस तरह से जप करने के लिए सुखासन या पद्मासन में ध्यान मुद्रा धारण की जाती है।
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मंत्र जाप करते समय इन नियमों का रखें ध्यान (Keep These Rules In Mind While Chanting Mantras)

- मंत्र जप से पहले शुद्धि आवश्यक है, इसलिए दैनिक क्रियाकलापों से निवृत्त होकर स्नान करने के बाद ही जप करना चाहिए। जप के स्थान को भी अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए तथा स्वच्छ आसन पर बैठकर जप करना चाहिए।
- जप के बाद आसन को इधर-उधर नहीं छोड़ना चाहिए और न ही पैरों से हटाना चाहिए। आसन को एक स्थान पर सुरक्षित रखना चाहिए। मंत्र जप के लिए कुश का आसन सर्वोत्तम माना जाता है, क्योंकि कुश ऊष्मा का अच्छा संवाहक है, जिससे मंत्र जप करते समय ऊर्जा हमारे शरीर में अवशोषित होती है।
-वैसे तो जप के लिए तुलसी की माला सर्वोत्तम होती है, लेकिन यदि किसी कार्य की सिद्धि के लिए जप किया जा रहा है, तो उक्त देवता के अनुसार ही माला लेनी चाहिए। जैसे भगवान शिव के लिए रुद्राक्ष तथा लक्ष्मी जी के लिए क्वार्ट्ज या कमलगट्टे की माला सर्वोत्तम मानी जाती है।
- मंत्र जप के लिए शांत स्थान का चयन करना चाहिए, ताकि जप में कोई बाधा न आए और ध्यान न भटके। जप के लिए सुबह का समय सर्वोत्तम होता है, क्योंकि इस समय वातावरण शांत, शुद्ध और सकारात्मक होता है। अगर आप हमेशा जप करते हैं तो आपको प्रतिदिन एक ही स्थान पर और एक निश्चित समय पर मंत्र जप करना चाहिए।
- मंत्र जपते समय माला को खुला न रखें। माला को हमेशा गौमुखी के अंदर ढककर रखना चाहिए।
- जप के लिए माला खरीदते समय यह देख लें कि उसमें 108 मनके हों और हर मनके के बीच में गांठ लगी हो। ताकि जप करते समय संख्या में कोई गलती न हो।
- जिस देवता का नाम आप जप रहे हैं, उसकी छवि को ध्यान में रखते हुए जप करना चाहिए और प्रतिदिन कम से कम एक माला अवश्य पूरी करनी चाहिए।
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