सोमवार का दिन भगवान शिव का वार माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार के दिन सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा की जाए तो सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह भी माना जाता है
सोमवार का दिन भगवान शिव का वार माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार के दिन सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा की जाए तो सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह भी माना जाता है कि सोमवार के दिन शिवलिंग पर गाय का कच्चा दूध चढ़ाने और रुद्राक्ष की माला से 108 बार ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शिव उपासना का सर्वमान्य पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय', जो आरंभ में ॐ के योग से षडाक्षर हो जाता है, भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करता है। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र को हृदय में धारण करने पर संपूर्ण शास्त्रों का ज्ञान और शुभ कार्यों का ज्ञान स्वतः ही प्राप्त हो जाता है। पंचतत्वों का प्रतिनिधित्व करता है यह मंत्र
शिव पुराण के अनुसार इस मंत्र के ऋषि वामदेव हैं और स्वयं शिव इसके देवता हैं। नमः शिवाय की पांच ध्वनियां ब्रह्मांड में मौजूद पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिनसे संपूर्ण ब्रह्मांड बना है और प्रलय के समय इसी में विलीन हो जाता है। भगवान शिव को ब्रह्मांड को नियंत्रित करने वाला देवता माना जाता है। क्रमशः 'ना' पृथ्वी को, 'मा' जल को, 'शि' अग्नि को, 'व' प्राणवायु को तथा 'य' आकाश को इंगित करता है। शिव के पंचशर मंत्र से सृष्टि के पांचों तत्वों को नियंत्रित किया जा सकता है। शिवपुराण के अनुसार एक बार माता पार्वती ने भोलेनाथ से पूछा कि कलियुग में सभी पापों को दूर करने के लिए किस मंत्र का जाप करना चाहिए? देवी पार्वती के इस प्रश्न का उत्तर देते हुए भगवान शिव कहते हैं कि प्रलय के समय जब सृष्टि में सब कुछ समाप्त हो गया था, तब मेरी आज्ञा से सभी वेद और शास्त्र पंचाक्षर में विलीन हो गए थे। सबसे पहले यह मंत्र भगवान शिव ने अपने पांच मुखों के माध्यम से ब्रह्मा जी को दिया था। मंत्र का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार "ओम नमः शिवाय" का जाप करने से भोलेनाथ बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और इस मंत्र का जाप करने से आपके सभी दुख और परेशानियां खत्म हो जाती हैं और भगवान शिव की असीम कृपा आप पर बरसने लगती है। स्कंदपुराण में कहा गया है कि- जिसके मन में महामंत्र 'ॐ नमः शिवाय' विराजमान है, उसके लिए अनेक मंत्रों, तीर्थों, तप और यज्ञों की आवश्यकता नहीं रहती। यह मंत्र मोक्ष प्रदाता, पापों का नाश करने वाला तथा साधक को लौकिक एवं पारलौकिक सुख प्रदान करने वाला है। मंत्र जाप की विधि
शास्त्रों के अनुसार इस मंत्र का जाप हमें किसी शिव मंदिर, तीर्थ या घर में साफ, शांत और एकांत स्थान पर बैठकर करना चाहिए। ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप प्रतिदिन कम से कम 108 बार रुद्राक्ष की माला से करना चाहिए, क्योंकि रुद्राक्ष भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। यदि आप पवित्र नदी के तट पर शिवलिंग की स्थापना और पूजा करने के बाद जप करते हैं, तो आपको सर्वोत्तम फल मिलेगा। शिव के 'ओम नमः शिवाय' मंत्र का जाप किसी भी समय किया जाता है। इसके उच्चारण से सभी इंद्रियां जागृत हो जाती हैं। 'ओम नमः शिवाय' मंत्र धार्मिक लाभ के अलावा स्वास्थ्य लाभ भी देता है। जप सदैव पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए।