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Mangal Dosh Nivaran: किस मंदिर में होती मंगल दोष की पूजा जानिए पूरी जानकारी

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Mon, 17 Jun 2024 07:08 AM IST
सार

Mangal Dosh Nivaran: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के सेनापति माने जाने वाले मंगल अगर कुंडली में मजबूत हों तो व्यक्ति बहुत साहसी, पराक्रमी और सभी चुनौतियों का बहादुरी से सामना करने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति को भूमि, भवन आदि से बहुत सुख मिलता है,

मंगल दोष
मंगल दोष- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Mangal Dosh Nivaran: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के सेनापति माने जाने वाले मंगल अगर कुंडली में मजबूत हों तो व्यक्ति बहुत साहसी, पराक्रमी और सभी चुनौतियों का बहादुरी से सामना करने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति को भूमि, भवन आदि से बहुत सुख मिलता है, इसके विपरीत अगर यह कमजोर हो तो व्यक्ति में ऊर्जा, साहस आदि की कमी होती है। ऐसे व्यक्ति का अक्सर लोगों से वाद-विवाद होता रहता है। उसे अपने अधिकारों को पाने के लिए कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं और उसके विवाह में बाधा आती है। अगर आपकी कुंडली में मंगल दोष है तो इसे दूर करने के लिए आपको एक बार मंगलनाथ मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना जरूर करनी चाहिए।
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मंगल दोष के क्या प्रभाव होते हैं:

- मंगल दोष वाले लोगों को विवाह में देरी या बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

- कुछ मामलों में मंगल दोष के कारण विवाह असफल भी हो सकता है।

- मंगल दोष वैवाहिक जीवन में कलह, तनाव और असंतोष का कारण बन सकता है।

- मंगल दोष स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, जैसे गुस्सा, रक्तचाप और दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकता है।

मंगल दोष से मुक्ति के लिए कहां करें पूजा


कुंडली में जिसकी शक्ति जीवन में सब कुछ शुभ लाती है, उसका मंदिर महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित है। यहां भूमिपुत्र मंगल की पूजा शिवलिंग के रूप में की जाती है। हालांकि महाकाल के भक्त मंगलनाथ भगवान को महादेव का ही रूप मानते हैं। मान्यता है कि धरती पर यह एकमात्र मंगलनाथ मंदिर है, जहां दर्शन करने से सभी की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

मंगलनाथ मंदिर की कहानी


पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार अंधकासुर नामक राक्षस ने अपनी कठोर तपस्या के बल पर भगवान शिव से वरदान प्राप्त कर लिया कि यदि उसके पसीने की एक बूंद भी धरती पर गिरेगी तो उससे सैकड़ों राक्षस पैदा हो जाएंगे। इसके बाद उसने इसका दुरुपयोग करते हुए पूरी धरती पर उत्पात मचाना शुरू कर दिया। मान्यता है कि जब देवताओं ने भगवान शिव को अपनी व्यथा सुनाई तो महादेव ने अंधकासुर से युद्ध करना शुरू कर दिया। युद्ध के दौरान जब महादेव के पसीने की एक बूंद धरती पर गिरी तो उसकी गर्मी से धरती फट गई और मंगल देवता प्रकट हुए और उन्होंने अंधकासुर के शरीर से निकलने वाले रक्त को अपने अंदर समाहित कर लिया। इसके बाद भगवान शिव ने अंधकासुर का वध कर दिया।
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भूमिपुत्र के लिए की जाती है भात पूजा


जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है, वे अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए मंगलनाथ धाम आते हैं और मंदिर में भात पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि विधि-विधान से मंगल देवता की पूजा और जाप करने से भगवान मंगलनाथ व्यक्ति के जीवन में शुभता ही लाते हैं। जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष के कारण विवाह में बाधा आ रही है, उनके द्वारा यहां की गई पूजा बहुत शुभ और फलदायी होती है।
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