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Lord Vishnu: भगवान विष्णु को क्यों कहा जाता है नारायण ? जानिए इसके पीछे की कहानी

जीवांजलि Published by: निधि Updated Wed, 19 Jun 2024 11:49 AM IST
सार

Lord Vishnu mythology Story:भगवान विष्णु को नारायण और हरि के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में आइये जानते हैं भगवान विष्णु के इन नामों के पीछे का रहस्य।
 

Lord Vishnu mythology Story
Lord Vishnu mythology Story- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Lord Vishnu mythology Story: भगवान विष्णु के कई नाम हैं जैसे हरि, अच्युत, जनार्दन, अनंत, पुरुषोत्तम आदि। इन सभी नामों का अपना महत्व है। भगवान विष्णु को नारायण के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान विष्णु को नारायण कैसे कहा जाने लगा? आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा।
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ऐसे पड़ा नारायण नाम

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के अनन्य भक्त देवर्षि नारद भगवान विष्णु को नारायण कहकर पुकारते थे। जल का पर्यायवाची शब्द नीर है। जिसे संस्कृत में प्रयोग करते समय कुछ स्थितियों में नर भी कहा जाता है। नारायण का शाब्दिक अर्थ है- जल जिसका प्रथम अयन या अधिष्ठान अर्थात निवास स्थान जल है। क्योंकि भगवान विष्णु वैकुंठ धाम में क्षीरसागर की अथाह गहराई में निवास करते हैं, इसलिए उन्हें नारायण कहा जाता है।

विष्णु पुराण में बताया भगवान विष्णु के  नारायण नाम का रहस्य

विष्णु पुराण में बताया गया है कि सृष्टि के अंत के समय सब कुछ जल में डूब जाता है और संपूर्ण ब्रह्मांड अंधकारमय हो जाता है। भगवान विष्णु चिर निद्रा में जल में सो जाते हैं। जब देवताओं का दिन शुरू होता है, तब भगवान विष्णु फिर से सृष्टि की रचना करते हैं और उनसे ब्रह्मा और शिव की उत्पत्ति होती है। भगवान विष्णु सबसे पहले मनुष्य रूप में प्रकट होते हैं। इसलिए शास्त्रों में उन्हें आदिपुरुष कहा गया है। आदि पुरुष विष्णु यानी 'अयन' का निवास स्थान नर यानी 'जल' है, इसलिए भगवान विष्णु को नारायण नाम से संबोधित किया जाता है।
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जानें अन्य नामों के अर्थ

विष्णु नाम का अर्थ - भगवान नारायण को विष्णु इसलिए कहा जाता है क्योंकि उनके कमल जैसे नेत्र हैं, वे चतुर्भुज हैं और कौस्तुकमणि से सुशोभित हैं तथा सर्वव्यापी हैं।

हरि नाम का अर्थ - भगवान विष्णु संसार के रक्षक होने के साथ-साथ दुखों को दूर करने वाले भी हैं। इसलिए उन्हें हरि के नाम से भी संबोधित किया जाता है।

अच्युत नाम का अर्थ - भगवान विष्णु के इस नाम का अर्थ है वह जिसका नाश न हो और जो अमर हो।

पुरुषोत्तम नाम का अर्थ - "पुरुषोत्तम" नाम का अर्थ है "पुरुषों में सर्वश्रेष्ठ" और यह विष्णु के कई विशेषणों में से एक है।
 

कैसे हुई भगवान विष्णु की उत्पत्ति

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव ने विष्णु को जन्म दिया। एक बार शिव ने पार्वती से कहा कि एक पुरुष होना चाहिए जो ब्रह्मांड की देखभाल कर सके। शक्ति की शक्ति के कारण विष्णु का जन्म हुआ। उनका रूप अनोखा था। उनकी आंखें कमल के समान थीं। वे चार भुजाओं वाले थे और कौस्तुकमणि से भी सुशोभित थे। साथ ही सर्वव्यापी होने के कारण उनका नाम विष्णु पड़ा। उन्होंने ब्रह्मांड की देखभाल की जिम्मेदारी ली। तभी से उन्हें जगत पालन भी कहा जाता है।

भगवान विष्णु को क्यों कहते हैं श्री हरि

भगवान विष्णु का एक नाम हरि भी है। हरि का अर्थ है हरने वाला और कुछ विशेष स्थितियों में हरि का अर्थ चुराने वाला भी माना जाता है। भगवान विष्णु सिर्फ रक्षक ही नहीं बल्कि दुख हरने वाले भी हैं। पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु की पूजा करने से वे अपने भक्तों के दुख और कष्ट दूर करने के लिए विवश हो जाते हैं। यही कारण है कि भगवान विष्णु को हरि कहा जाता है। विष्णु पुराण में लिखी पंक्ति 'हरि हरति पापनि' में भी इसका जिक्र है। इस पंक्ति का अर्थ है हरि यानी भगवान विष्णु, जो जीवन के सभी पापों और दुखों को दूर करते हैं।
 

भगवान विष्णु को कैसे करें प्रसन्न

आपको बता दें कि गुरुवार के दिन आपको पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए और व्रत रखकर उनकी पूजा करनी चाहिए। इस दिन अगर आप भगवान विष्णु के किसी भी मंत्र का जाप करेंगे तो आपको लाभ ही लाभ मिलेगा। इस दिन आपको नारायण की तस्वीर के सामने घी का दीया जरूर जलाना चाहिए। इससे घर में सुख-शांति बनी रहेगी।
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