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Kyon Beemaar Padte Hain Bhagavan Jagannaath: रथ यात्रा से पहले क्यों बीमार पड़ जाते हैं भगवान जगन्नाथ

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Mon, 24 Jun 2024 04:43 PM IST
सार

Kyon Beemaar Padte Hain Bhagavan Jagannaath हर साल पुरी में जगन्नाथ यात्रा का भव्य आयोजन किया जाता है। यहां हर साल लाखों की संख्या में भक्त भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए आते हैं ।

भगवान जगन्नाथ
भगवान जगन्नाथ- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Kyon Beemaar Padte Hain Bhagavan Jagannaath  : हर साल पुरी में जगन्नाथ यात्रा का भव्य आयोजन किया जाता है। यहां हर साल लाखों की संख्या में भक्त भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए आते हैं । आपको बता दें कि  ओड़िशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर पूरे देश- दुनिया में अपने चमत्कारों को लेकर प्रसिद्ध है। और यहां की रथ यात्रा मंदिर के मुख्य आकर्षण का केंद्र  है।  हर साल आषाढ के महीने ओडिशा के पुरी में भव्य रथयात्रा का आयोजन किया जाता है और लोग भगवान की एक झलक पाने के लिए आतुर रहते हैं। लेकिन रथ यात्रा से ठीक 15 दिन पहले जगन्नाथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं क्योंकि जगन्नाथ जी बीमार पड़ जाते हैं। आप भी सोच रहे होंगे की क्या भगवान भी बीमार होते हैं चलिए आपको इस लेख में हम बताते हैं कि भगवान जगन्नाथ  क्यों बीमार पड़ जाते हैं 
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क्यों बीमार पड़ते हैं भगवान जगन्नाथ ? Kyon Beemaar Padte Hain Bhagavan Jagannaath ?

आपको बता दें कि ओडिशा के लोगों और मंदिरों के ज्योतिषों का कहना है कि यात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ 15 दिनों के लिए बीमार हो जाते हैं यात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ को 15 दिनों तक बुखार रहता है और यह परंपरा हर साल निभाई जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान श्री कृष्ण अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ पुरी में अपनी मौसी के घर गए थे, तो उन्होंने वहां स्नान किया था। जिसके बाद तीनों भाई-बहन बीमार पड़ गए और उन्हें बुखार हो गया था तब उनके इलाज के लिए राज वैद्य को बुलाया गया। 

15 दिन तक बीमार रहते हैं भगवान जगन्नाथ  15 Din Tak Beemaar Rahate Hain Bhagavan Jagannaath ?

राज वैद्य ने उनका इलाज किया और 15 दिनों में तीनों पूरी तरह ठीक हो गए। जिसके बाद वे नगर में भ्रमण के लिए निकले। सबसे खास बात यह है कि आज भी जगन्नाथ यात्रा शुरू होने से पहले जगन्नाथ जी के बीमार पड़ने की परंपरा उसी तरह निभाई जाती है। आज भी जगन्नाथ यात्रा शुरू होने से पहले ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र जी और सुभद्रा जी को 108 घड़ों के जल से स्नान कराया जाता है, जिसे सहस्त्रधारा स्नान कहते हैं। मान्यता है कि ठंडे पानी से स्नान करने के बाद तीनों बीमार पड़ जाते हैं और फिर उन्हें 15 दिनों तक एकांत में रखा जाता है और इस दौरान मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। इस दौरान भगवान को आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से बनी औषधियां और काढ़ा दिया जाता है। 15 दिनों के बाद जब भगवान स्वस्थ हो जाते हैं तो उनकी रथ यात्रा निकाली जाती है। इस दौरान हजारों की संख्या में भक्त भगवान के दर्शन के लिए उमड़ते हैं। 
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रथ यात्रा का उत्सव कितने दिनों तक चलता है? Rath Yatra Ka Utsav Kitne Dino Tak Chalta Hai?

आपको बता दें कि  हर साल आषाढ़ माह की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ गर्भगृह से बाहर निकलकर रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। इसके साथ ही वे अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं और वहां पूरे सात दिनों तक रहते हैं। इसके बाद वे वापस अपने मंदिर लौट जाते हैं। आपको बता  दें कि रथ यात्रा  का उत्सव पूरे 10 दिनों तक चलते है । इस यात्रा में शामिल होने के लिए देश- विदेश से लोग आते हैं 

इस साल कब से शुरु होगी जगन्नाथ यात्रा   Is Saal Kab Se Shuru Hogee Jagannaath Yatra

इस साल  वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 07 जुलाई को प्रातः 04:24 मिनट पर शुरु  हो रही है और  यह तिथि 08 जुलाई को प्रातः 04:59 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि को हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और उत्सव के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा 07 जुलाई 2024, रविवार को निकलेगी।

जगन्नाथ यात्रा का क्या है महत्व Jagannaath Yaatra Ka Kya Hai Mahatv

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण पुरी में भगवान जगन्नाथ के रूप में धरती पर निवास करते हैं। साल  में एक बार उनकी रथ यात्रा निकालने का विधान है, जिसमें भाग लेने वाले भाग्यशाली लोगों को 100 यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है। भगवान जगन्नाथ की कृपा से लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि आषाढ़ माह में पुरी में स्नान करने से सभी तीर्थों के दर्शन के बराबर पुण्य मिलता है।  इस पर्व की कृपा से मानव जीवन की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। आपको बता दें कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का हिंदुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन भक्त रथ यात्रा के दौरान जुलूस में रथ को खींचने को पवित्र मानते हैं। ऐसा कहा जाता है कि रथ को छूने और खींचने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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