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Laddu Gopal: भगवान श्री कृष्ण को क्यों कहा जाता है लड्डू गोपाल? पढ़िये क्या है इस नाम के पीछे की कहानी

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Fri, 21 Jun 2024 10:50 AM IST
सार

Laddu Gopal: धार्मिक ग्रंथों में भगवान विष्णु के 10 अवतारों का उल्लेख किया गया है और द्वापर में उन्होंने भगवान कृष्ण के रूप में जन्म लिया था। भगवान कृष्ण के इस अवतार ने लोगों को धर्म के साथ-साथ कर्म का भी ज्ञान दिया।

Laddu Gopal:
Laddu Gopal:- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Laddu Gopal: धार्मिक ग्रंथों में भगवान विष्णु के 10 अवतारों का उल्लेख किया गया है और द्वापर में उन्होंने भगवान कृष्ण के रूप में जन्म लिया था। भगवान कृष्ण के इस अवतार ने लोगों को धर्म के साथ-साथ कर्म का भी ज्ञान दिया। आज भी हर घर में भगवान कृष्ण के कई रूपों की पूजा की जाती है। जिनमें से एक है कान्हा जी का रूप, जिन्हें घरों में लड्डू गोपाल के रूप में पूजा जाता है और एक बच्चे की तरह पूजा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि माखन और दही खाने वाले कान्हा जी को लड्डू गोपाल क्यों कहा जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे छिपी कहानी के बारे में।
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क्यों कहा जाता है कान्हा जी को लड्डू गोपाल?

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान कृष्ण के बहुत बड़े भक्त कुंभनदास ब्रज भूमि में रहते थे और उनका एक पुत्र था, जिसका नाम रघुनंदन था। कुंभनदास भगवान कृष्ण के बहुत बड़े भक्त थे और उनकी भक्ति में लीन रहते थे। भक्ति में लीन रहने के कारण वे अपना घर और मंदिर छोड़कर कहीं नहीं जाते थे। एक बार कुंभनदास को वृंदावन से भागवत कथा का निमंत्रण मिला और वे चाहकर भी उसे मना नहीं कर सके। उन्होंने कथा में जाने का निर्णय लिया और अपने बेटे रघुनंदन को भगवान कृष्ण की पूजा की पूरी जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने उसे यह भी कहा कि शाम को कान्हा जी को भोग जरूर लगाना।

पिता को रघुनंदन पर हो गया संदेह

भगवान कृष्ण ने रघुनंदन द्वारा परोसा गया सारा भोजन खा लिया और उन्हें आशीर्वाद देकर अंतर्ध्यान हो गए। जब कुंभनदास घर लौटे तो उन्होंने देखा कि भोजन की थाली खाली थी, जिसे देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ। उन्होंने सोचा कि शायद उनका बेटा भूखा रहा होगा और इसीलिए उसने यह भोजन खा लिया। लेकिन अब ऐसा रोज होने लगा और रोजाना भोजन के बाद थाली खाली हो जाती। कुंभनदास ने देखा कि उनका बेटा रघुनंदन अब उनसे ज्यादा श्री कृष्ण की पूजा में रुचि लेने लगा है। एक दिन वह रघुनंदन को पूजा करते देखने के लिए दीवार के पीछे छिप गए।
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लड्डू गोपाल के दर्शन

शाम के समय रघुनंदन कान्ही जी की पूजा करने लगा और फिर उन्हें भोग की थाली परोसी. थाली परोसते ही सामने कान्हा जी बाल स्वरूप में प्रकट हो गए. जैसे कुम्भनदास ने यह दृश्य देखा उससे रहा नहीं गया और वह कान्हा जी के चरणों में आ गिरे. जिस समय कुम्भनदास उनके चरणों में गिरे हुए थे तब कान्हा जी के हाथ में लड्डू था और वह उसी रूप में वहां जड़ गए. भगवान श्रीकृष्ण को गोपाल कहते हैं लेकिन उस समय जब उनके हाथ में लड्डू था तो उनका नाम लड्डू गोपाल पड़ गया.

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