विज्ञापन
Home  dharm  kaanvad yatra is saal kabse suru hogi kaanvad yatra janiye tithi aur subh muhurt

Kawad Yatra 2024 :  इस साल कब से शुरु होगी कांवड़ यात्रा? जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Wed, 10 Jul 2024 05:06 AM IST
सार

Kawad Yatra 2024 : सावन का महीना बहुत पवित्र माना जाता है आपको बता दें कि सावन के महीने  में भगवान शिव और मां पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस पवित्र महीने में कांवड़ यात्रा भी निकाली जाती है।

कांवड़ यात्रा
कांवड़ यात्रा- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Kawad Yatra 2024 : सावन का महीना बहुत पवित्र माना जाता है आपको बता दें कि सावन के महीने  में भगवान शिव और मां पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस पवित्र महीने में कांवड़ यात्रा भी निकाली जाती है। चलिए आपको बताते हैं कि इस साल सावन महीने में कब से कांवड़ यात्रा कब से शुरु होगी 
विज्ञापन
विज्ञापन

कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा 2024? Kab Se Shuru Hogee Kawad Yatra 2024

इस साल  22 जुलाई से सावन का महीना शुरु होगा जो 19 अगस्त को खत्म होगा। इस साल कांवड़ यात्रा भी  22 जुलाई से शुरू होगी जो कि सावन माह की शिवरात्रि पर खत्म होगी । सावन माह की शिवरात्रि इस बार 2 अगस्त को मनाई जाएगी इसी दिन सभी कांवड़िए जल लेकर शिवलिंग पर चढ़ाएंगे

कैसे होती कांवड़ यात्रा? Kaise Hotee Kawad Yatra 2024 

सावन के महीने में शिव भक्त गंगा तट पर कलश में गंगाजल भरकर उसे कांवड़ पर बांधकर कंधे पर लटकाकर अपने क्षेत्र के शिव मंदिर में लाते हैं और शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाते हैं। शास्त्रों के अनुसार सबसे पहले कांवड़ यात्रा की शुरुआत भगवान परशुराम ने की थी। परशुराम गढ़मुक्तेश्वर धाम से गंगाजल लेकर आए थे और यूपी के बागपत के पास स्थित 'पुरा महादेव' का गंगाजल से अभिषेक किया था। तभी से कांवड़ यात्रा करने की परंपरा चली आ रही है।
विज्ञापन


कांवड यात्रा में शामिल होने के नियम क्या है  Kawad Yatra 2024  Mein Shaamil Hone Ke Niyam Kya Hai

इस यात्रा में कभी भी मौज-मस्ती के लिए शामिल नहीं होना चाहिए। यह यात्रा भक्ति भाव से करें क्योंकि इस यात्रा के लिए कई नियमों का पालन करना होता है।

कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी तरह के नशीले पदार्थ जैसे चरस, गांजा, शराब आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

कांवड़ यात्रा के दौरान कभी भी मांसाहारी भोजन नहीं करना चाहिए।

कांवड़ को कभी भी जमीन या चबूतरे पर नहीं रखना चाहिए।

कांवड़ यात्रा के दौरान जब भी आप रुकें तो कांवड़ को किसी स्टैंड या पेड़ की टहनी पर टांग दें। अगर आप गलती से इसे जमीन पर रख देते हैं तो आपको दोबारा पानी भरना पड़ेगा।

कांवड़ में हमेशा किसी बहती नदी का पानी भरें, कुएं या तालाब का नहीं।

यात्रा शुरू करने से पहले और अंत तक पैदल चलें, किसी वाहन का इस्तेमाल न करें।

अगर आप पहली बार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं तो यात्रा को छोटा ही रखें। बाद में आप अपनी क्षमता के अनुसार इस यात्रा को आगे बढ़ा सकते हैं।

बिना स्नान किए कांवड़ को छुआ नहीं जा सकता, इसलिए कांवड़िया स्नान करने के बाद ही कावड़ को छू सकते हैं।

कांवड़ ले जाते समय रास्ते भर बोल बम और जय शिव-शंकर का जाप करना फलदायी होता है। कांवड़ को सिर पर रखना भी वर्जित माना गया है।

यह भी पढ़ें:-
Unluck Plants for Home: शुभ नहीं, बल्कि अशुभ माने जाते हैं ये पौधे ! घर में लगाने से आती है दरिद्रता
Garuda Purana : गरुण पुराण क्या है, क्यों किया जाता है इसका पाठ? जानिए
Panchmukhi Shiv: भगवान शिव के क्यों है पांच मुख? जानिए इन 5 मुख का रहस्य
विज्ञापन