विज्ञापन
Home  dharm  jagannath rath yatra 2024 when will the jagannath rath yatra start this year know the importance of the yatr

Jagannath Rath Yatra 2024: इस साल कब से शुरु होगी जगन्नाथ रथ यात्रा, जानिए यात्रा का मह्त्व

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Thu, 20 Jun 2024 03:58 PM IST
सार

Jagannath Rath Yatra 2024: जगन्नाथ का अर्थ है 'ब्रह्मांड के स्वामी'। भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। हर साल ओडिशा के पुरी शहर में रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है

जगन्नाथ रथ यात्रा
जगन्नाथ रथ यात्रा- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Jagannath Rath Yatra 2024: जगन्नाथ का अर्थ है 'ब्रह्मांड के स्वामी'। भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। हर साल ओडिशा के पुरी शहर में रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। इस त्योहार के दिन मुख्य रूप से तीन देवताओं की पूजा की जाती है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा शामिल हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

कब से शुरु होगी  जगन्नाथ रथ यात्रा? Kab Se Suru Hogi Jagannath Rath Yatra

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 7 जुलाई 2024 को सुबह 04:26 मिनट से  शुरू हो रही है। द्वितीया तिथि 8 जुलाई 2024 को सुबह 04:59 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार 2024 में जगन्नाथ रथ यात्रा 7 जुलाई से शुरू होने जा रही है।

हर साल क्यों की जाती है जगन्नाथ रथ यात्रा? Har Saal Kyon Kee Jaatee Hai Jagannath Rath Yatra

ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि को भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र को गर्भगृह से बाहर लाया जाता है और उन्हें स्नान कराया जाता है। मान्यता है कि इसके बाद भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ जाते हैं और उन्हें बुखार हो जाता है। इसके कारण भगवान जगन्नाथ 15 दिनों तक अपने शयन कक्ष में विश्राम करते हैं। इस दौरान पुरी मंदिर 15 दिनों के लिए बंद रहता है और भक्तों को दर्शन की अनुमति होती है। इसके बाद आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को वे स्वस्थ होकर अपने विश्राम कक्ष से बाहर आते हैं और इसी खुशी में भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है।
विज्ञापन


 

कैसे निकाली जाती है जगन्नाथ यात्रा Kaise Nikaalee Jaatee Hai Jagannath Rath Yatra

भव्य पुरी रथ यात्रा के लिए जगन्नाथ जी, बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए तीन अलग-अलग रथ बनाए जाते हैं। यात्रा में सबसे आगे बलभद्र जी का रथ, बीच में बहन सुभद्रा और सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ जी का रथ निकलता है। विशाल रथों पर बैठकर भगवान अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं, जहां वे कुछ दिनों तक विश्राम करते हैं। इसके बाद वे फिर से अपने घर लौट आते हैं

जगन्नाथ यात्रा का क्या है महत्व Jagannath Rath Yatra Ka Kya Hai Mahatv

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण पुरी में भगवान जगन्नाथ के रूप में धरती पर निवास करते हैं। वर्ष में एक बार उनकी रथ यात्रा निकालने का विधान है, जिसमें भाग लेने वाले भाग्यशाली लोगों को 100 यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है। भगवान जगन्नाथ की कृपा से लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि आषाढ़ माह में पुरी में स्नान करने से सभी तीर्थों के दर्शन के बराबर पुण्य मिलता है। 10 दिन के इस महोत्सव के प्रताप से इंसान जिंदगी की तमाम समस्याएं भी हल हो जाती हैं. आपको बता दें कि हिन्दुओं के लिए भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन श्रद्धालु रथ यात्रा के दौरान निकलने वाले जुलूस में रथ को खींचना पवित्र मानते हैं। ऐसा कहा जाता है कि रथ को छूने और खींचने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
 

Akshat Puja: पूजा में क्यों चढ़ाया जाता है अक्षत, जानिए अक्षत का महत्व

Lord Vishnu: भगवान विष्णु को क्यों कहा जाता है नारायण ? जानिए इसके पीछे की कहानी

Shani Upay: कैसे पहचानें कुंडली में कमजोर शनि के लक्षण? जानिए शनि ग्रह को मजबूत करने के उपाय

विज्ञापन