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Jagannath Mandir: जगन्नाथ मंदिर के प्रसाद को क्यों कहा जाता है महाप्रसाद? जानिए

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Mon, 01 Jul 2024 06:37 PM IST
सार

Jagannath Mandir: जगन्नाथ मंदिर  पूरे विश्व में बहुत प्रसिद्ध है आपको बता दें कि  इस मंदिर के  बहुत से ऐसे रहस्य हैं जिन्हें वैज्ञानिक भी आज तक  नहीं समझ पाए है। आपको बता दें कि जब भी हम किसी मंदिर जाते हैं तो वहां हमे प्रसाद मिलता है।

जगन्नाथ मंदिर
जगन्नाथ मंदिर- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Jagannath Mandir:  जगन्नाथ मंदिर  पूरे विश्व में बहुत प्रसिद्ध है आपको बता दें कि  इस मंदिर के  बहुत से ऐसे रहस्य हैं जिन्हें वैज्ञानिक भी आज तक  नहीं समझ पाए है। आपको बता दें कि जब भी हम किसी मंदिर जाते हैं तो वहां हमे प्रसाद मिलता है। इसी तरह जगन्नाथ मंदिर में भी प्रसाद मिलता है जिसे महाप्रसाद कहा जाता है। चलिए आपको बताते हैं कि जगन्नाथ मंदिर के प्रसाद को  महाप्रसाद क्यों कहा जाता है 
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जगन्नाथ मंदिर के प्रसाद को क्यों कहा जाता है महाप्रसाद 

पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि एकादशी व्रत के दिन एक बार महाप्रभु वल्लभाचार्य जगन्नाथ मंदिर पहुंचे । जिसके बाद भगवान जगन्नाथ ने उनकी निष्ठा की परिक्षा लेने का निर्णय किया और उन्हें 56 प्रकार के व्यंजनों से बना भोग प्रसाद के रूप में ग्रहण करने को दिया। वल्लभाचार्य ने प्रसाद तो ले लिया लेकिन उसे द्वादशी स्तवन खत्म होने के बाद ही ग्रहण किया। इसके बाद ही यहां के प्रसाद को महाप्रसाद कहा जाने लगा। बता दें कि ऐसा कहा जाता है कि जब प्रसाद तैयार होता है तब भगवान जगन्नाथ खुद रसोई में आते हैं इसलिए भी इसे महाप्रसाद कहा जाता है 


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किस तरह बनाया जाता है महाप्रसाद 

आपको बता दें कि जगन्नाथ मंदिर की रसोई में प्रसाद बनाने की विधि बहुत खास होती है ऐसा कहा जाता है कि यहां प्रसाद बनाने के लिए गैस का इस्तेमाल नहीं किया जाता है । यहां प्रसाद मिट्टी के चूल्हों पर एक के ऊपर एक 7 मिट्टी के बर्तन रखकर पकाई जाती है वहीं लोगों का कहना है कि सबसे ऊपर रखे बर्तन का खान सबसे पहले पकता है  इसके साथ ही इस रसोई में कभी भी खाना खत्म नहीं होता है महाप्रसाद लगभग 600-700 रसोइयों द्वारा बनाया जाता है, जो लगभग 50 हजार भक्तों के बीच वितरित किया जाता है

सबसे पहले किसे लगाया जाता है भोग 

जगन्नाथ पुरी में सबसे पहला भोग भगवान जगन्नाथ को लगाया जाता है इसके बाद  देवी विमला  को लगाया जाता है जिस महाप्रसाद कहा जाता है। आपको बता दें कि ये प्रसाद आनंद बाजार में मंदिर के अंदर तैयार किया जाता है इसे सबसे बड़ा ओपन- एयर रेस्तरां  भी कहा जाता है इस प्रसाद को भक्त ना सिर्फ खा सकते हैं बल्कि इसे खरीद भी सकते हैं 
 

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