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Importance of Rudhraksha: क्या है एक मुखी से चौदह मुखी तक के रुद्राक्ष का महत्व? जानिए किस मंत्र से करें इसे ध

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Sun, 30 Jun 2024 12:01 PM IST
सार

Importance of Rudhraksha:  भगवान   शिव के भक्तों के लिए सावन का महीना बेहद पवित्र माह होता है। इस पूरे महीनें शिव की सेवा करने से शिव लोक की प्राप्ति हो जाती है। इस बार सावन की शुरुआत और अंत दोनों सोमवार को हो रहा है

रुद्राक्ष का महत्व
रुद्राक्ष का महत्व- फोटो : jeevanjali

विस्तार


Importance of Rudhraksha:  भगवान   शिव के भक्तों के लिए सावन का महीना बेहद पवित्र माह होता है। इस पूरे महीनें शिव की सेवा करने से शिव लोक की प्राप्ति हो जाती है। इस बार सावन की शुरुआत और अंत दोनों सोमवार को हो रहा है इसलिए कुल 5 व्रत आएंगे। सावन 22 जुलाई सोमवार से शुरू होकर 19 अगस्त सोमवार को ही पूर्ण होने जा रहा है। आज इस लेख में हम आपको एक मुखी से लेकर चौदह मुखी तक के रुद्राक्ष का महत्व समझाने जा रहे है और साथ में यह भी बताने वाले है कि किस मन्त्र से इसे धारण करना चाहिए। 
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एक मुख

एक मुख वाला रुद्राक्ष साक्षात शिव का स्वरूप है। वह भोग और मोक्ष रूपी फल प्रदान करता है। जहां रुद्राक्ष की पूजा होती है वहां से लक्ष्मी दूर नहीं जाती। उस स्थान के सारे उपद्रव नष्ट हो जाते हैं तथा वहां रहने वाले लोगों की संपूर्ण कामनाएं पूर्ण होती हैं।

मन्त्र - ॐ ह्रीं नमः

दो मुख

दो मुख वाला रुद्राक्ष देवदेवेश्वर कहा गया है। वह संपूर्ण कामनाओं और फलों को देने वाला है।

मन्त्र - ॐ नमः

तीन मुख

तीन मुख वाला रुद्राक्ष सदा साक्षात साधन का फल देने वाला है, उसके प्रभाव से सारी विद्याएं प्रतिष्ठित होती है।

मन्त्र - ॐ क्लीं नमः

चार मुख

चार मुख वाला रुद्राक्ष साक्षात ब्रह्मा का रूप है। वह दर्शन और स्पर्श से शीघ्र ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थ को देने वाला है।

मन्त्र - ॐ ह्रीं नमः

पांच मुख

पंचमुखी रुद्राक्ष समस्त पापों को दूर कर देता है और समस्त सिद्धि मिलती है।

मन्त्र - ॐ ह्रीं नमः

छह मुख

छः मुख वाला रुद्राक्ष कार्तिकेय का स्वरूप है। यदि दाहिनी बांह में उसे धारण किया जाए तो धारण करने वाला मनुष्य ब्रह्महत्या आदि पापों से मुक्त हो जाता है। इसमें संशय नहीं है।
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मन्त्र - ॐ ह्रीं हुं नमः


सात मुख

महेश्वरी! 7 मुख वाला रुद्राक्ष आनंद स्वरूप और अनंग नाम से ही प्रसिद्ध है। उसको धारण करने से दरिद्र भी ऐश्वरयशाली हो जाता है।

मन्त्र - ॐ हुं नमः

आठ मुख

8 मुख वाला रुद्राक्ष अष्टमूर्ति भैरव रूप है, उसको धारण करने से मनुष्य पूर्ण आयु होता है और मृत्यु के पश्चात शूल धारी शंकर हो जाता है।  

मन्त्र - ॐ हुं नमः


नौ मुख

9 मुखी रुद्राक्ष को भैरव तथा कपिल मुनि का प्रतीक माना गया है अथवा नो रूप धारण करने वाली महेश्वरी दुर्गा उस की अधिष्ठात्री देवी मानी गई है। जो मनुष्य भक्ति प्रायण हो अपने बाएं हाथ में नव मुखी रुद्राक्ष को धारण करता है वह निश्चय ही मेरे समान सर्वेश्वर हो जाता है इसमें संशय नहीं है।

मन्त्र - ॐ ह्रीं हुं नमः

दस मुख

10 मुख वाला रुद्राक्ष साक्षात भगवान विष्णु का रूप है।

मन्त्र - ॐ ह्रीं नमः

ग्यारह मुख

11 मुख वाला जो रुद्राक्ष है वह रूद्र रूप है। उसको धारण करने से मनुष्य सर्वत्र विजयी होता है।

मन्त्र - ॐ ह्रीं हुं नमः

बारह मुख

12 मुखी रुद्राक्ष को केस प्रदेश में धारण करें, उसके धारण करने से मानव मस्तक पर 12 आदित्य विराजमान हो जाते हैं।

मंत्र - ॐ क्राँ क्षाँ राँ नमः

तेरह मुख

तेरह मुख वाला रुद्राक्ष विष्णु का स्वरूप है। उसको धारण करके मनुष्य संपूर्ण अभीष्ट को पाता तथा सौभाग्य और मंगल लाभ करता है।

मन्त्र - ॐ ह्रीं नमः

चौदह मुख

 14 मुखी रुद्राक्ष परम शिवरुप है उसे भक्ति पूर्वक मस्तक पर धारण करें इससे समस्त पापों का नाश हो जाता है।

मन्त्र - ॐ नमः

रुद्राक्ष की माला धारण करने वाले पुरुष को देखकर भूत, प्रेत, डाकिनी, शाकिनी है वह सब के सब दूर भाग जाते हैं जो करीब होते हैं वह सब रुद्राक्ष धारी को देखकर दूर खिसक जाते हैं।  साधु को चाहिए कि वह निद्रा और आलस्य का त्याग करके श्रद्धा भक्ति से संपन्न हो संपूर्ण की सिद्धि के लिए मंत्रों द्वारा रुद्राक्ष को धारण करें।
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