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Lord Vishnu: पृथ्वी की बारह भू मंडलीय प्लेट कैसे बनी ? जानिए विष्णु और पृथ्वी की कहानी

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Thu, 04 Jul 2024 06:00 AM IST
सार

Lord Vishnu: जब इस ब्रह्माण्ड के निर्माण की प्रक्रिया अस्तित्व में आने लगी तब ब्रह्मा जी ने अपनी ध्यान की अवस्था में प्रवेश किया जिससे चार वेदों का जन्म हुआ।

Lord Vishnu
Lord Vishnu- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Lord Vishnu: जब इस ब्रह्माण्ड के निर्माण की प्रक्रिया अस्तित्व में आने लगी तब ब्रह्मा जी ने अपनी ध्यान की अवस्था में प्रवेश किया जिससे चार वेदों का जन्म हुआ। जब ब्रह्मा ने इन 4 वेदों को प्रकट किया उसी समय विष्णु जी के कान के मल से दो जीव रेंगते हुए बाहर आने लगे। उनमे से एक को शहद की इच्छा हुई इसलिए उसका नाम मधु हुआ और दूसरा कीट के जैसा दिखाई दे रहा था इसलिए उसका नाम कैटभ हुआ। उन्हें ये पता नहीं था कि वो इस समय कहां है? वो जब अपने चारों और देखने लगे तो उन्हें जल ही जल दिखाई देने लगा। 
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दोनों भाइयों ने उसी द्रव्य को पीना शुरू कर दिया। जैसे जैसे वो उसे पीते जा रहे थे वैसे ही उनका आकार बढ़ता जा रहा था। जब उनके सिर और शरीर का आकार बहुत बढ़ गया तब दोनों भाई ब्रह्मा जी के पास जा पहुंचे। कमल के आसन को देखकर दोनों भाई क्रोध से भर उठे और ब्रह्मा जी को वह आसन छोड़ने के लिए कहा। उस समय ब्रह्मा जी ने कुछ नहीं कहा जिससे दोनों भाई भड़क गए। ब्रह्मा ने जब उनके युद्ध का निवेदन अस्वीकार किया तो दोनों भाइयों ने कमल दल को हिलाना शुरू कर दिया जिसके कारण वेद ब्रह्मा जी के हाथ से छूट गए। 

उन दोनों भाइयों ने वेद को पानी के नीचे छिपा दिया। जब ब्रह्मा जी को यह अहसास हुआ कि ये दोनों भाई सृष्टि की बाकी वस्तुओं को भी हानि पहुंचा सकते है तो उन्होंने विष्णु का आह्वान किया। विष्णु ने जब ब्रह्मा जी को चिंचित देखा तो वो समझ गए कि यह सृष्टि संकट में है। ब्रह्मा जी ने उन्हें मधु कैटभ का वृतांत कह सुनाया। इसके बाद विष्णु ने अश्व के सिर वाले जीव का अवतार लिया जिसे हयग्रीव अवतार कहा गया। इसके बाद भगवान् विष्णु उन दोनों भाइयो से युद्ध करने लगे। एक भाई थक जाता तो दूसरा भाई युद्ध करने लग जाता। ऐसा करते करते पांच हजार साल निकल गए। श्री विष्णु को यह समझ आ गया कि इन्हे परास्त करके के लिए बुद्धि का सहारा लेना होगा। 
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इसलिए उन्होंने युद्ध बीच में रोक दिया और उन दोनों भाइयों से प्रसन्न होकर उन्हें वर मांगने के लिए कहा। वो दोनों भाई विष्णु का मजाक उड़ाने लगे और कहा कि तुम तो खुद हमारे सामने डर से कांप रहे हो ! तुम हमें क्या वरदान दे सकते हो ? हम दोनों भाई वीर है, अगर तुम चाहो तो तुम वरदान मांग लो। विष्णु को इसी अवसर की प्रतीक्षा थी। उन्होंने दोनों भाइयों से कहा, मुझे वरदान दो कि मैं तुम्हारा वध कर पाऊं। अब दोनों भाई जाल में फंस चुके थे लेकिन उन्हें अपने जीवित रहने का एक विकल्प दिखाई दिया। उन्होंने देखा कि चारों ओर जल ही जल था। उन्होंने विष्णु से कहा कि तुम हमें मार पाओगे लेकिन एक ऐसी जगह जहां जल नहीं हो ! 

हयग्रीव के रूप में विष्णु मुस्कुराने लगे और देखते ही देखते उन्होंने अपना आकार बड़ा कर लिया। दोनों भाइयों को उनका चेहरा नहीं दिखाई दे रहा था। उनका स्वरुप एक नीले पर्वत की भांति हो गया था। इसके बाद उन्होंने दोनों भाइयों को अपनी एक एक जंघा पर रखा और दोनों का सिर काट डाला। श्री हरि विष्णु ने मधु का अंत किया इसलिए उनका एक नाम मधुसूदन भी हुआ। विष्णु ने वेदों को प्राप्त किया और दोनों भाइयों के शव से मेद, वसा को निकाला। 

उन दोनों भाइयों की मेद से ही ब्रह्मा जी ने इस भूमि का निर्माण किया इसलिए इस पृथ्वी को मेदिनी कहा गया और मिट्टी को अनुपयुक्त माना गया। दोनों शरीर के पिंड के छह छह भाग हुए जिससे पृथ्वी की बारह भू मंडलीय प्लेट बनी। इसके बाद अपने कमल पर आसीन हुए ब्रह्मा जी ने एक बार फिर इस सृष्टि की रचना का काम शुरू कर दिया।
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