Shani Upay: नौ ग्रहों में अपना स्थान रखने वाले शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है। वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं।
Shani Upay: नौ ग्रहों में अपना स्थान रखने वाले शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है। वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। ज्योतिष शास्त्र में उन्हें न्यायाधीश का स्थान प्राप्त है। लेकिन अगर कुंडली में शनि अशुभ स्थान पर बैठा हो तो शनि दोष बनता है, जिसके कारण व्यक्ति के जीवन में कई तरह की परेशानियां आने लगती हैं। शनि दोष होने पर कई लक्षण दिखने लगते हैं, उन संकेतों को जानकर आप शनि दोष से मुक्ति पा सकते हैं।
शनि दोष के लक्षण
यदि कुंडली में शनि दोष है तो व्यक्ति का धन और संपत्ति धीरे-धीरे अनावश्यक चीजों पर खर्च होने लगती है।
शनि दोष होने पर वाद-विवाद की स्थिति बनती है, व्यक्ति पर झूठे आरोप लगते हैं। इसके अलावा कोर्ट-कचहरी के मामले सामने आते हैं।
शराब, जुआ और अन्य बुरी आदतें भी शनि दोष का कारण बनती हैं। काम में रुकावटें, कर्ज का बोझ, घर में आग लगना, मकान बिक जाना या उसका कोई हिस्सा गिर जाना आदि भी शनि दोष के लक्षण माने जाते हैं।
यदि व्यक्ति की कुंडली में शनि दोष है तो व्यक्ति के बाल समय से पहले झड़ने लगते हैं, आंखें खराब होने लगती हैं, कानों में दर्द रहता है। खराब शनि शारीरिक कमजोरी, पेट दर्द, टीबी, कैंसर, चर्म रोग, फ्रैक्चर, लकवा, जुकाम, अस्थमा आदि जैसी बीमारियों का कारण बनता है।
यदि किसी का शनि खराब है तो उसे अपनी मेहनत का फल नहीं मिलता। नौकरी में परेशानियां आती हैं और घर में छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होते रहते हैं।
शनि ग्रह को मजबूत करने के उपाय
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनि अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की जड़ में कच्चा दूध मिला मीठा जल चढ़ाने, तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाने से कई तरह के कष्ट दूर होते हैं। शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान पीपल के पेड़ की पूजा करने और उसकी परिक्रमा करने से शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। इस दिन पीपल का पेड़ लगाना सुख-शांति बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
हर शनिवार को एक लोहे की कटोरी में साबुत उड़द, काले चने और सरसों का तेल मिलाकर रख लें। अब इसे काले कपड़े में लपेटकर माथे से लगाएं और दान करना शुरू कर दें, इससे शनि दोष कम होता है।
शनिवार के दिन शनि देव के दिव्य मंत्र 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनिश्चराय नमः' का जाप करने से व्यक्ति भय से मुक्त रहता है।
शनि देव के आराध्य देव भगवान शिव हैं। शनि दोष की शांति के लिए शनिवार के दिन शनि देव की पूजा करने के साथ ही 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हुए काले तिल मिले जल से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए।
शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए व्यक्ति को शनिवार के दिन व्रत रखना चाहिए और गरीब लोगों की मदद करनी चाहिए, ऐसा करने से जीवन में आ रही परेशानियां दूर होने लगती हैं। हनुमानजी की पूजा करने वालों पर शनिदेव हमेशा प्रसन्न रहते हैं, इसलिए उनकी कृपा पाने के लिए शनि पूजा के साथ-साथ हनुमानजी की भी पूजा करनी चाहिए, इससे शनि दोष से मुक्ति मिलती है।