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Guru purnima 2024: क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा? जानिए इसके पीछे की कहानी

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Thu, 11 Jul 2024 03:16 PM IST
सार

Guru purnima 2024: सनातन धर्म में गुरु का स्थान भगवान के बराबर बताया गया है। कहा जाता है कि भगवान के बाद गुरु ही हमें सभी परेशानियों से बचने का रास्ता दिखाते हैं।

Guru purnima 2024
Guru purnima 2024- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Guru purnima 2024: सनातन धर्म में गुरु का स्थान भगवान के बराबर बताया गया है। कहा जाता है कि भगवान के बाद गुरु ही हमें सभी परेशानियों से बचने का रास्ता दिखाते हैं। ऐसे में साल का एक दिन गुरु की महिमा, महत्व और सम्मान को दर्शाने के लिए समर्पित किया गया है। जिसे हम गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। इसलिए इस दिन गुरु की पूजा की जाती है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है। आइए जानते हैं इस साल यह किस दिन मनाई जाएगी और इस दिन का क्या महत्व है?
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महर्षि वेदव्यास को समर्पित है पर्व

वेदों, उपनिषदों और पुराणों को लोकप्रिय बनाने वाले महर्षि वेदव्यास को समस्त मानव जाति का गुरु माना जाता है। महर्षि वेदव्यास का जन्म ईसा से लगभग तीन हज़ार साल पहले आषाढ़ पूर्णिमा को हुआ था। उनके सम्मान में हर साल गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है।
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गुरु पूर्णिमा व्रत कथा

आषाढ़ मास की पूर्णिमा के दिन व्रत रखने का भी विशेष महत्व है और कहा जाता है कि कथा के बिना यह व्रत पूर्ण नहीं होता है। व्रत रखने वालों को इस दिन कथा अवश्य पढ़नी और सुननी चाहिए। कहा जाता है कि महर्षि वेद व्यास ने बाल्यकाल में अपने माता-पिता से भगवान के दर्शन की इच्छा व्यक्त की थी, लेकिन माता सत्यवती ने वेद व्यास की इच्छा को अस्वीकार कर दिया था।

तब वेद व्यास जिद करने लगे और उनके आग्रह पर उनकी माता ने उन्हें वन जाने की अनुमति दे दी। साथ ही कहा कि जब भी उन्हें घर की याद आए, वे वापस आ जाएं। इसके बाद वेद व्यास तपस्या के लिए वन में चले गए और वन में जाकर उन्होंने कठोर तपस्या की। इस तपस्या के पुण्य से वेद व्यास को संस्कृत भाषा में निपुणता प्राप्त हुई। इसके बाद उन्होंने चारों वेदों का विस्तार किया और महाभारत, अठारह महापुराण और ब्रह्मसूत्र की रचना की। महर्षि वेद व्यास को चारों वेदों का ज्ञान था। यही कारण है कि इस दिन गुरु की पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा कैसे करें?

1. अगर आपको गुरु पूर्णिमा पर कोई गुरु नहीं मिला है तो आपको उस व्यक्ति की पूजा करनी चाहिए जिसने आपको जन्म नहीं दिया, आपकी मां की। क्योंकि, माता-पिता गुरु से भी ऊपर होते हैं।

2. गुरु के आशीर्वाद से ही शिष्य को शिक्षा प्राप्त होती है।

3. गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उनसे आशीर्वाद लेने के लिए यह दिन बहुत अच्छा माना जाता है।

4. इस दिन गुरुओं की सेवा करनी चाहिए। इसके साथ ही उन्हें उपहार भी देना चाहिए।
 
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