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Guru Purnima 2024: क्या है गुरु पूर्णिमा का महत्व, जानिए तिथि और पूजा विधि

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Sat, 06 Jul 2024 05:00 AM IST
सार

Guru Purnima 2024: गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आषाढ़ मास की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। गुरु पूर्णिमा हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह दिन भगवान वेद व्यास और सभी गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।

गुरु पूर्णिमा 2024:
गुरु पूर्णिमा 2024:- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Guru Purnima 2024: गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आषाढ़ मास की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। गुरु पूर्णिमा हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह दिन भगवान वेद व्यास और सभी गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान वेद व्यास का जन्म हुआ था। वेद व्यास को महाभारत, पुराण और वेदों का रचयिता माना जाता है। यह दिन गुरु-शिष्य परंपरा का सम्मान करने का अवसर है। गुरु पूर्णिमा ज्ञान और शिक्षा के महत्व का प्रतीक है। यह दिन आध्यात्मिक प्रगति के लिए प्रार्थना करने का अवसर है। इस दिन शिष्य अपने गुरुओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
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गुरु पूर्णिमा 2024 तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि 20 जुलाई को शाम 05:59 बजे शुरू होगी और यह अगले दिन यानी 21 जुलाई को दोपहर 03:46 बजे समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि का अधिक महत्व है। ऐसे में गुरु पूर्णिमा का पर्व 21 जुलाई को मनाया जाएगा।

क्या है  गुरु पूर्णिमा का महत्व

कबीर दास जी ने लिखा है- गुरु गोविंद दोनों खड़े काके लागूं पाए, बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो मिलाए। कबीर दास जी का यह दोहा गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त कर रहा है। गुरु पूर्णिमा गुरु और शिष्य की परंपरा के लिए खास है। गुरु अपने ज्ञान से शिष्य को सही राह पर ले जाते हैं और उसे ईश्वर का एहसास कराते हैं। इसलिए हर साल गुरुओं के सम्मान में यह पर्व मनाया जाता है। गुरु के अलावा गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। इस दिन गाय की पूजा, सेवा और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और आरोग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही गुरु की पूजा करने से कुंडली में मौजूद गुरु दोष भी खत्म होता है। इस दिन कई मंदिरों और मठों में गुरु पूजा की जाती है।
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गुरु पूर्णिमा पूजा विधि

सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें

स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा कक्ष को साफ करें।

भगवान वेद व्यास और अपने गुरु की मूर्ति स्थापित करें।

दीप जलाएं और धूपबत्ती अर्पित करें।

फूल, फल और मिठाई चढ़ाएं। गुरु मंत्रों का जाप करें। गुरु चालीसा का पाठ करें। अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें। जरूरतमंदों को दान करें। इन मंत्रों का जाप करें। गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देव महेश्वरः यह पर्व शिक्षा और ज्ञान के महत्व को दर्शाता है और शिक्षकों के प्रति सम्मान बढ़ाता है। आप गरीबों, ब्राह्मणों या किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर सकते हैं। गुरु पूर्णिमा पर दान करना भी बेहद पवित्र माना जाता है। गुरु पूर्णिमा समाज में आध्यात्मिक मार्गदर्शन का प्रतीक है, जो लोगों को सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को उजागर करता है और हमें अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। इस दिन को पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाना चाहिए, ताकि हमें ज्ञान, शांति और आध्यात्मिक उन्नति मिल सके।

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