facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  garuda purana which are 16 cities that come in way of yamalok

Garuda Purana: यमलोक के रास्ते में आने वाले 16 नगर कौन से हैं, गरुड़ पुराण में क्या है जिक्र?

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Yamlok Ka Rasta: यमलोक के रास्ते में मरने के बाद आत्मा को किन चीजों से गुजरना पड़ता है, किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस सबके बारे में गरुड़ पुराण में क्या लिखा है? आइए जानते हैं...

यमलोक के रास्ते में आने वाले 16 नगर कौन से हैं, गरुड़ पुराण में क्या है जिक्र?
Garuda Purana Yamlok Ka Rasta: गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में से एक है, जो मुख्य रूप से मृत्यु के बाद की घटनाओं, आत्मा की यात्रा और कर्मों के अनुसार मिलने वाले फलों का विस्तृत वर्णन करता है। इस ग्रंथ में यमलोक के रास्ते में आने वाले 16 नगरों का भी उल्लेख है, जहां से होकर हर पापी आत्मा को गुजरना पड़ता है। यह यात्रा बेहद कष्टदायक और लंबी होती है, जो जीवात्मा के लिए उसके पापों का हिसाब-किताब चुकाने की शुरुआत है।

यमलोक की कठिन यात्रा

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद जीवात्मा को यमदूत ले जाते हैं। यह यात्रा 99 हजार योजन लंबी होती है, जिसे आत्मा को अकेले तय करना पड़ता है। इस दौरान आत्मा को भूख, प्यास, गर्मी और ठंड जैसी भयंकर पीड़ाओं का सामना करना पड़ता है। यह पूरी यात्रा 16 नगरों से होकर गुजरती है, जिनमें से हर नगर का अपना एक अलग महत्व और कष्ट है।

यमलोक के रास्ते में आने वाले 16 नगर

  1. सौम्यपुर: यह यात्रा का पहला पड़ाव है। यहां आत्मा को अपने कर्मों का लेखा-जोखा दिखाया जाता है। जिन लोगों ने अच्छे कर्म किए होते हैं, वे यहां शांति का अनुभव करते हैं, जबकि पापियों को आगे की यात्रा के लिए तैयार किया जाता है।
  2. सौरिपुर: यह नगर पापियों को उनके दुष्कर्मों के लिए सचेत करता है। यहां आत्मा को अपने किए गए बुरे कामों का स्मरण कराया जाता है।
  3. केंद्रपुर: यहां आत्मा को अपने जीवन में किए गए गलत फैसलों और अनैतिक कार्यों के लिए पछतावा होता है।
  4. गंदर्वपुर: इस नगर में, उन आत्माओं को रखा जाता है जिन्होंने दूसरों को धोखा दिया होता है।
  5. श्रोतापुर: यह नगर उन लोगों के लिए है जो अपने जीवन में धन और ऐश्वर्य के पीछे भागते रहे, लेकिन धर्म के मार्ग का पालन नहीं किया।
  6. वैवस्तपुर: यह यमराज के सबसे निकट के नगरों में से एक है।
  7. अवर्कर: इस नगर में, उन आत्माओं को रखा जाता है जिन्होंने अपने जीवन में दूसरों को बहुत कष्ट पहुंचाया।
  8. स्थावरपुर: यह नगर उन लोगों के लिए है जो आलसी थे और अपने जीवन का सदुपयोग नहीं किया।
  9. भयवापुर: यहां आत्मा को उसके पापों का भय दिखाया जाता है।
  10. मिश्रपुर: यह नगर उन लोगों के लिए है जिन्होंने अपने जीवन में अच्छे और बुरे दोनों कर्म किए हैं।
  11. कंकालपुर: जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह नगर हड्डियों और कंकालों से भरा है। यहां आत्मा को उसके पापों का कठोर दंड मिलता है।
  12. चित्रपुर: यह नगर चित्रगुप्त के निकट है। यहां आत्मा के कर्मों का अंतिम लेखा-जोखा तैयार किया जाता है।
  13. कालानलपुर: इस नगर में, आत्मा को भयानक आग और भयंकर गर्मी से गुजरना पड़ता है।
  14. बहुभीतिपुर: यहां आत्मा को भय और पीड़ा का अनुभव होता है।
  15. सुतप्तपुर: यह नगर उन लोगों के लिए है जिन्होंने अपने जीवन में बहुत पाप किए हैं, और उन्हें यहां कठोर सजा दी जाती है।
  16. रुद्रपुर: यह यात्रा का अंतिम नगर है, जहां आत्मा को यमराज के सामने प्रस्तुत होने से पहले शुद्ध किया जाता है।

इन नगरों का उद्देश्य

गरुड़ पुराण में इन 16 नगरों का वर्णन आत्मा को डराने के लिए नहीं, बल्कि मनुष्यों को धर्म के मार्ग पर चलने और अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करने हेतु किया गया है। यह यात्रा एक प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व है कि हर कर्म का फल मिलता है। जो व्यक्ति धर्म और नैतिकता के साथ जीवन जीता है, उसे इस मार्ग पर कष्ट नहीं झेलने पड़ते, जबकि पाप करने वालों के लिए यह मार्ग अत्यंत पीड़ादायक होता है। यह ग्रंथ हमें बताता है कि मृत्यु के बाद भी जीवन खत्म नहीं होता, बल्कि कर्मों के अनुसार एक नई यात्रा शुरू होती है।

ये भी पढ़ें - श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को क्यों बताया था पूजनीय, कैसे तोड़ा था इंद्र देव का घमंड?

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel