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Ganesh Puja: बुधवार के दिन क्यों की जाती है गणेश भगवान की पूजा? जानें वजह और पूजा विधि

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Thu, 13 Jun 2024 05:06 AM IST
सार

Ganesh Puja: भगवान गणेश सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय हैं। उन्हें बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। गणेश जी अपने भक्तों के कष्ट भी हरते हैं, जिस कारण उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। शास्त्रों में बुधवार का दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए समर्पित है।

गणेश पूजा
गणेश पूजा- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Ganesh Puja: भगवान गणेश सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय हैं। उन्हें बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। गणेश जी अपने भक्तों के कष्ट भी हरते हैं, जिस कारण उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। शास्त्रों में बुधवार का दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए समर्पित है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बुधवार के दिन ही भगवान गणेश की पूजा क्यों की जाती है? बुधवार सप्ताह का तीसरा दिन होता है और यह दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए समर्पित होता है। हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता की पूजा के लिए समर्पित होता है। इसी तरह बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा का प्रावधान है। मान्यता है कि यह दिन भगवान गणेश को बहुत प्रिय होता है और इस दिन की गई पूजा से वे प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। चलिए आपको बताते हैं कि बुधवार को क्यों की जाती है गणेश पूजा
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बुधवार को क्यों की जाती है गणेश पूजा Why is Ganesh Puja performed on Wednesday?


पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवी पार्वती ने भगवान गणेश की रचना की थी, तब भगवान बुध भी कैलाश पर्वत पर मौजूद थे। इसलिए गणेश की पूजा के लिए बुध उनका प्रतिनिधि दिन बन गया और इसी वजह से बुधवार को भगवान गणेश की पूजा का विधान किया गया। एक अन्य मान्यता के अनुसार, जब भगवान शिव त्रिपुरासुर का वध करने में असफल रहे, तो उन्होंने सोचा कि वे क्यों असफल हुए और उनके काम में क्या बाधा आई। तब उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने गणेश की पूजा किए बिना ही युद्ध शुरू कर दिया था। इसके बाद गणेश की पूजा की गई। उन्हें फूल-मालाएं अर्पित की गईं और प्रसाद के रूप में लड्डू चढ़ाए गए। इसके बाद जब युद्ध हुआ, तो त्रिपुरासुर की हार हुई। यही वजह है कि हर काम से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है, ताकि काम बिना किसी बाधा के पूरा हो जाए।


गणेश जी का बीज मंत्र Beej Mantra of Lord Ganesha

गणेश जी का बीज मंत्र है "ॐ गं गणपतये नम:. यह मंत्र गणेश जी को समर्पित है और उनकी पूजा और आराधना में उच्चारित किया जाता है. "ॐ" एक ब्रह्मान्ध, सर्वव्यापी, और उत्तम मंत्र है, जो समस्त देवताओं की उत्पत्ति का सिद्धांत है. "गं" गणेश जी का बीज मंत्र है और "गणपतये" उनके नाम का उत्तम समर्थन है. "नमः" का अर्थ है श्रद्धा सहित नमस्कार करना.
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इस मंत्र को नियमित रूप से जप करने से भक्त को गणेश जी की कृपा, विज्ञान की बुद्धि, और समस्त कार्यों में सफलता प्राप्त होती है. यह मंत्र समस्त अवस्थाओं में समृद्धि का स्रोत माना जाता है.

गणेश पूजा विधि Ganesh Puja Vidhi


भगवान गणेश की पूजा करने के लिए सुबह उठकर अपने दैनिक काम निपटा लें।
इसके बाद स्नान करके पूजा शुरू कर देनी चाहिए। 
भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर के सामने साफ आसन पर बैठकर उनका ध्यान करें। 
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है। 
भगवान गणेश की पूजा में धूप, दीप, पुष्प, दूर्वा, रोली, लाल चंदन, कपूर और मोदक का इस्तेमाल किया जाता है। 
पूजा के दौरान गणेशजी को सूखे सिंदूर का तिलक लगाना शुभ माना जाता है।
पूजा के बाद भगवान गणेश की आरती करें और इस मंत्र का जाप करें

मंत्र- ''ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुद्धि प्रचोदयात्''


गणेश जी की आरती  Aarti of Lord Ganesha


जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

'सूर' श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो,
जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
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