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Gajanan Sankashti Chaturthi 2024:  इस साल कब मनाई जाएगी गजानन संकष्टी चतुर्थी, जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Thu, 20 Jun 2024 03:58 PM IST
सार

Gajanan Sankashti Chaturthi 2024 :  हर साल सावन मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि के अगले दिन गजानन संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन गजानन यानी भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसके साथ ही संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी रखा जाता है।

गजानन संकष्टी चतुर्थी
गजानन संकष्टी चतुर्थी- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Gajanan Sankashti Chaturthi 2024 :  हर साल सावन मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि के अगले दिन गजानन संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन गजानन यानी भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसके साथ ही संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी रखा जाता है। ऋद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश की पूजा करने से भक्त की आय, सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी तरह के दुख और संकट भी दूर हो जाते हैं। इसी वजह से भगवान गणेश को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। इसलिए साधक संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की भक्ति भाव से पूजा करते हैं। आइए जानते हैं गजानन संकष्टी चतुर्थी की तिथि, शुभ मुहूर्त और योग
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किस शुभ मुहूर्त में करें गजानन संकष्टी चतुर्थी पर पूजा  Kis Shubh Muhoort Mein Karen Gajaanan Sankashtee Chaturthee Par Pooja

पंचांग के अनुसार सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 24 जुलाई को ब्रह्म बेला में 07:30 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 25 जुलाई को सुबह 04:19 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि मान्य है। इसलिए गजानन संकष्टी चतुर्थी 24 जुलाई को मनाई जाएगी। इस तिथि पर चंद्रोदय का समय रात 09:38 मिनट है।


 

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गजानन संकष्टी चतुर्थी पर कौन से योग बन रहे हैं  Gajaanan Sankashtee Chaturthee Par Kaun Se Yog Ban Rahe Hain

गजानन संकष्टी चतुर्थी पर सौभाग्य और शोभन योग बन रहा है। इस दिन सौभाग्य योग सुबह 11:11 मिनट तक है। इसके बाद शोभन योग का संयोग बन रहा है। शोभन योग 25 जुलाई को सुबह 07:49 मिनट तक है। इस दौरान भगवान गणेश की पूजा करने से साधक को मनचाहा वर प्राप्त होगा।

गजानन संकष्टी चतुर्थी  पर किस विधि से करें पूजा Gajaanan Sankashtee Chaturthee  Par Kis Vidhi Se Karen Pooja

स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

घर के उत्तर-पूर्व कोने में एक चौकी रखें। उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति रखें।

फिर गणेश जी का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।

गणेश जी को पान, अक्षत, जल और दूर्वा अर्पित करें ।

पूजा करते समय मन ही मन ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें।

भगवान गणेश को मोदक या फिर लड्डू का भोग लगाएं।

गणेश जी की पूजा करने के बाद रात में चंद्र देव की पूजा करें। चंद्र देव को दूध, चंदन और शहद अर्पित करें और फिर अपना व्रत खोलें।

गजानन संकष्टी चतुर्थी पर पढ़ें यह कथा Gajaanan Sankashtee Chaturthee Par Padhen Ye Katha

इस कथा के अनुसार प्राचीन समय में एक नगर में एक साहूकार और उसकी पत्नी रहते थे। साहूकार दंपत्ति भगवान पर विश्वास नहीं करते थे और निःसंतान थे। एक दिन साहूकार की पत्नी अपने पड़ोसी के घर गई। उस समय पड़ोसी की पत्नी संकट चौथ की कथा कह रही थी। तब पड़ोसी ने साहूकार की पत्नी ने उसे संकष्टी चतुर्थी के बारे में बताया। उसने कहा कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से भगवान सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। तब साहूकार की पत्नी ने भी संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा और सवा किलो तिलकुट का भोग लगाया।

इसके बाद साहूकार की पत्नी गर्भवती हुई और उसने एक पुत्र को जन्म दिया। जब साहूकार का बेटा बड़ा हुआ तो उसने भगवान से कहा कि अगर उसके बेटे की शादी तय हो जाए तो वह यह व्रत रखेगी और प्रसाद चढ़ाएगी। भगवान की कृपा से साहूकार के बेटे की शादी तय हो गई लेकिन साहूकार की मां व्रत पूरा नहीं कर पाई। इससे भगवान नाराज हो गए और उन्होंने विवाह के दौरान दूल्हे को एक पीपल के पेड़ से बांध दिया। उसके बाद जिस लड़की की शादी नहीं हो पा रही थी वह उस पीपल के पेड़ के पास से गुजरी। तभी पीपल के पेड़ से आवाज आई- ओ अर्धविवाहिता! तब लड़की की माँ साहूकार की पत्नी के पास गई और सारी बात बताई। तब साहूकार की पत्नी ने भगवान से माफ़ी मांगी और पुत्र प्राप्ति के बाद व्रत रखने और प्रसाद चढ़ाने की प्रार्थना की। कुछ दिनों के बाद साहूकार की पत्नी को पुत्र की प्राप्ति हुई और उसका विवाह हो गया। तब से सभी गाँव वाले संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने लगे।

 

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