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First Wedding Invitation: सबसे पहले भगवान को क्यों दिया जाता है शादी का कार्ड? जानिए

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Mon, 01 Jul 2024 06:07 AM IST
सार

First Wedding Invitation:  हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव देव की पूजा की जाती है। आषाढ़ माह में 28 जून से  विवाह और सुख के कारक शुक्र ग्रह का उदय हो गया है 

पहला विवाह निमंत्रण
पहला विवाह निमंत्रण- फोटो : jeevanjali

विस्तार

First Wedding Invitation:शादी में आमंत्रित करने के लिए सबसे जरूर होता है विवाह का कार्ड । क्योंकि इसके बिना लोगों को पता ही नहीं चलता कि शादी है । शादी का कार्ड देकर ही लोगों को आमंत्रित किया जाता है लेकिन शादी में सबसे पहले किसे आमंत्रित किया जाता है किसे शादी का सबसे पहला कार्ड दिया जाता है क्या आप जानते हैं अगर नहीं तो इस लेख  को जरूर पढ़िए
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किसको दिया जाता है शादी का पहला कार्ड?

ज्योतिषियों के अनुसार, पहला शादी का कार्ड (पहला विवाह निमंत्रण अनुष्ठान) ऋद्धि-सिद्धि के कारक भगवान गणेश को दिया जाता है। इस समय निम्न मंत्र का उच्चारण कर शादी का कार्ड दिया जाता है और शादी में आने का निमंत्रण दिया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि निमंत्रण मिलने के बाद भगवान गणेश अदृश्य रूप में शादी में अवश्य उपस्थित होते हैं। उनकी कृपा से विवाह में कोई बाधा नहीं आती है। साथ ही विवाह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न होता है।

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥


भगवान शिव और विष्णु

ज्योतिष शास्त्र में जगत के पालनहार और देवों के देव महादेव भगवान विष्णु को शादी का पहला कार्ड देने का नियम है। इसलिए शादी का पहला कार्ड भी भगवान विष्णु या भगवान विष्णु को ही दिया जाता है। यह व्यक्ति की सुविधा पर निर्भर करता है। अगर आस-पास कोई गणेश मंदिर है तो सबसे पहले शादी का कार्ड भगवान गणेश को दिया जाता है। अगर कोई सुविधा न हो तो भगवान विष्णु या नजदीकी मंदिर में प्रतिष्ठित देवता को दिया जाता है। भगवान विष्णु को शादी का कार्ड देते समय निम्न मंत्र का जाप किया जाता है।
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मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।

मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

आमंत्रण कौन देता है?

इस बारे में ज्योतिषियों का कहना है कि निमंत्रण वर या वधू द्वारा दिया जाना सबसे अच्छा होता है। वर या वधू की अनुपस्थिति में वर या वधू के माता-पिता भगवान को आमंत्रित कर सकते हैं। इस समय विधि-विधान से देवताओं की पूजा करें। इसके बाद सफल विवाह की कामना करते हुए भगवान को शादी का कार्ड देना चाहिए। हालांकि, देवताओं को शादी का कार्ड देते समय स्थानीय रीति-रिवाजों का पालन जरूर करें। कई जगहों पर शादी का निमंत्रण सबसे पहले कुल देवता को दिया जाता है। इसके बाद अन्य देवताओं को आमंत्रित किया जाता है। देवी-देवताओं को आमंत्रित करने के बाद आपको अपने पूर्वजों को भी शादी में आमंत्रित करना चाहिए। अपने पूर्वजों की बिल्कुल भी उपेक्षा न करें, ऐसा करने से विवाह में कोई न कोई बाधा अवश्य आएगी।

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