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Dhanteras 2025: 18 या 19 अक्टूबर कब है धनतेरस, जानें सही तिथि और पूजा महत्व

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Dhanteras Puja: धनतेरस न केवल धन-संपत्ति की पूजा का दिन है, बल्कि यह दिन स्वास्थ्य, आयु, और समृद्धि की प्राप्ति का भी प्रतीक है। इस दिन पूजा, दीपदान और शुभ वस्तुओं की खरीदारी करने से जीवन में सुख-शांति और वैभव बना रहता है। 

18 या 19 अक्टूबर कब है धनतेरस, जानें सही तिथि और पूजा महत्व
Dhanteras 2025 Tithi: भारत में दीपावली से पहले आने वाला धनतेरस (धनत्रयोदशी) एक अत्यंत शुभ और मंगलकारी पर्व माना जाता है। यह पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है और पांच दिवसीय दीपावली महापर्व की शुरुआत भी इसी दिन से होती है। इस दिन का नाम "धनतेरस" इसलिए पड़ा क्योंकि इस दिन "धन" अर्थात संपत्ति और "तेरस" अर्थात त्रयोदशी तिथि का संगम होता है। धनतेरस का संबंध समुद्र मंथन से जुड़ा है। 

मान्यता है कि जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया, तब उस समय धन्वंतरि देव अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक माना जाता है और इस दिन उनकी विशेष पूजा का विधान है। इसी कारण यह दिन स्वास्थ्य, समृद्धि और दीर्घायु का प्रतीक बन गया। इसके अलावा एक मान्यता यह भी है कि धनतेरस के दिन यमराज की पूजा कर दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय टलता है। इसीलिए इस दिन "यम दीपम" जलाने की परंपरा है।

पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि (धनत्रयोदशी) 18 अक्टूबर दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और 19 अक्टूबर दोपहर 1 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। तिथि का प्रारंभ 18 अक्टूबर को ही दिन में हो रहा है, इसलिए वह दिन धनतेरस माना जाएगा। यदि तिथि सूर्योदय से पहले प्रारंभ होती, तो मामला उल्टा हो सकता, लेकिन इस वर्ष प्रारंभ ठीक समय पर हो रहा है। इसलिए यह स्पष्ट है कि 18 अक्टूबर 2025 को ही धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा।

पूजा-मुहूर्त और शुभ समय

धनतेरस पूजा करने का शुभ समय इस वर्ष इस प्रकार है
  • धनतेरस के दिन पूजा मुहूर्त शाम 07 बजकर 16 मिनट से 08 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।
  • प्रदोष काल शाम 5 बजकर 48 मिनट से रात 8 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। 
  • वृषभ काल (अति शुभ समय) शाम 7 बजकर 16 मिनट से रात 9 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।
  • कुछ स्रोतों में सोने-चांदी की शुभ खरीदारी का समय भी तिथि आरंभ से लेकर तिथि समापन तक (दोपहर 12:18 से अगले दिन 1:51 बजे तक) बताया गया है।  

धनतेरस पूजा विधि

  • घर की शुद्धि और सजावट: इस दिन सुबह स्नान के बाद घर की सफाई की जाती है और आंगन में रंगोली बनाई जाती है।
  • भगवान धन्वंतरि और देवी लक्ष्मी की पूजा: पूजा स्थान पर भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर दीप प्रज्वलित करें।
  • कुबेर पूजन: धन और वैभव के देवता कुबेर की विशेष पूजा करना शुभ माना जाता है।
  • यम दीपदान: रात में घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर यमराज को अर्पित किया जाता है।
  • संपत्ति का पूजन: इस दिन सोना, चांदी, धातु के बर्तन या नए सामान की खरीदारी करके उनका पूजन करना विशेष शुभ माना जाता है।

धनतेरस का महत्व

धनतेरस के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है। भगवान धन्वंतरि की आराधना करने से स्वास्थ्य उत्तम रहता है। दीपदान और कुबेर पूजन से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यम दीपम जलाने से परिवार के सदस्यों की आयु में वृद्धि होती है। धनतेरस न केवल धन-संपत्ति की पूजा का दिन है, बल्कि यह दिन स्वास्थ्य, आयु, और समृद्धि की प्राप्ति का भी प्रतीक है। इस दिन पूजा, दीपदान और शुभ वस्तुओं की खरीदारी करने से जीवन में सुख-शांति और वैभव बना रहता है। इसलिए इसे दीपावली पर्व की सबसे शुभ शुरुआत माना जाता है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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