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Pitru Paksha 2025: पितृपक्ष में भूल से भी न खरीदें ये चीजें, जीवन में आते हैं कष्ट!

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Pitru Paksha Upay: हिन्दू धर्म में पितृपक्ष के दौरान कुछ चीजों को खरीदना अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से जीवन में परेशानियां आने लगती हैं और धीरे-धीरे कष्ट बढ़ जाते हैं। इसलिए इन चीजों को खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है।  

पितृपक्ष में भूल से भी न खरीदें ये चीजें, जीवन में आते हैं कष्ट!
Pitru Paksha 2025 Upay Niyam: हिन्दू धर्म में पितृपक्ष का बहुत अधिक महत्व होता है। पितृपक्ष का समय पूर्वजों को याद करने और उनका सम्मान करने के लिए होता है। इस दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के 15 दिनों में कुछ चीजों की खरीदारी से बचना चाहिए, क्योंकि माना जाता है कि ऐसा करने से जीवन में कष्ट आ सकते हैं और पूर्वज नाराज हो सकते हैं। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान कुछ विशेष वस्तुओं की खरीदारी से बचें।

पितृपक्ष में क्या नहीं खरीदें

नए कपड़े और जूते

पितृपक्ष में नए कपड़े, जूते या कोई भी नई वस्तु खरीदना शुभ नहीं माना जाता हैष यह समय शोक का होता है, इसलिए इन दिनों नए कपड़े पहनना या खरीदना अच्छा नहीं माना जाता है।

लोहा और तेल

इस दौरान लोहे से बनी कोई भी चीज, जैसे बर्तन, या गाड़ी आदि नहीं खरीदनी चाहिए। इसके अलावा, तेल की खरीदारी से भी बचना चाहिए। इन वस्तुओं को खरीदना अशुभ माना जाता है।

नया घर या गाड़ी

पितृपक्ष में किसी भी बड़े निवेश से बचना चाहिए। इस दौरान घर, गाड़ी, या किसी भी तरह की संपत्ति खरीदने की योजना को टाल देना चाहिए।

सोना-चांदी

सोने-चांदी के आभूषण खरीदना भी पितृपक्ष के दौरान शुभ नहीं माना जाता है। यह समय पूर्वजों को समर्पित है, न कि भौतिक सुख-सुविधाओं की खरीदारी का।

कोई भी मांगलिक वस्तु

पितृपक्ष के दौरान कोई भी मांगलिक वस्तु जैसे विवाह से जुड़ी चीजें, या कोई भी शुभ काम से जुड़ी वस्तु नहीं खरीदनी चाहिए। इससे वैवाहिक जीवन में बाधाएं आती हैं। 

पितृपक्ष में क्या करें

पूर्वजों के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करना चाहिए। पितृपक्ष में दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दौरान गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन कराना शुभ माना जाता है। पीपल के पेड़ को जल अर्पित करना चाहिए। कौवे, कुत्ते, और गाय को भोजन देना चाहिए।

पितृपक्ष का महत्व

पितृपक्ष हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण समय होता है, जो अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करने और उनका तर्पण करने के लिए समर्पित है। यह 15-16 दिनों की अवधि होती है जो भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर अश्विन मास की अमावस्या तक चलती है। इस दौरान, यह माना जाता है कि पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा दिए गए भोजन और तर्पण को स्वीकार करते हैं। ऐसा करने से वे प्रसन्न होते हैं और अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं।

पितृपक्ष का मुख्य उद्देश्य अपने पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करना और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करना है। ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों का श्राद्ध और तर्पण नहीं किया जाता है, उनकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है। इस समय किए गए कर्मकांड से पितृदोष भी दूर होता है।

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