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Devshayani Ekadashi : देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु के इन मंत्रों का करें जाप, मिलेगा बहुत लाभ

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Thu, 04 Jul 2024 02:11 PM IST
सार

Devshayani Ekadashi :  एकादशी का हिन्दु धर्म में बहुत अधिक महत्व है। आपको बता दें कि एकादशी तिथि  भगवान विष्णु को समर्पित है इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

देवशयनी  एकादशी
देवशयनी एकादशी- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Devshayani Ekadashi :  एकादशी का हिन्दु धर्म में बहुत अधिक महत्व है। आपको बता दें कि एकादशी तिथि  भगवान विष्णु को समर्पित है इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। हिन्दुु धर्म में हर एकादशी का अपना  अलग- महत्व है। आाषाढ़ माह में पड़ने वाली एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है । इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने के  लिए योग निद्रा में चले जाते हैं । इस दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना बहुत फलदायी होता है । 

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भगवान विष्णु 108 नाम मंत्र

ॐ श्री विष्णवे नमः
ॐ श्री केशवाय नमः
ॐ श्री मुकुन्दाय नमः
ॐ श्री सत्यधर्माय नमः
ॐ श्री परमात्मने नमः
ॐ श्री पुरुषोत्तमाय नमः
ॐ श्री हिरण्यगर्भाय नमः
ॐ श्री उपेन्द्राय नमः
ॐ श्री माधवाय नमः
ॐ श्री अनन्तजिते नमः
ॐ श्री महेन्द्राय नमः
ॐ श्री नारायणाय नमः
ॐ श्री सहस्त्राक्षाय नमः
ॐ श्री प्रजापतये नमः
ॐ श्री भूभवे नमः
ॐ श्री प्राणदाय नमः
ॐ श्री देवकी नन्दनाय नमः
ॐ श्री सुरेशाय नमः
ॐ श्री जगतगुरूवे नमः
ॐ श्री सनातन नमः
ॐ श्री सच्चिदानन्दाय नमः
ॐ श्री दानवेन्द्र विनाशकाय नमः
ॐ श्री एकातम्ने नमः
ॐ श्री शत्रुजिते नमः
ॐ श्री घनश्यामाय नमः
ॐ श्री वामनाय नमः
ॐ श्री गरुडध्वजाय नमः
ॐ श्री धनेश्वराय नमः
ॐ श्री पद्मनाभाय नमः
ॐ श्री कृष्णाय नमः
ॐ श्री विश्वातमने नमः
ॐ श्री गोविन्दाय नमः
ॐ श्री लक्ष्मीपतये नमः
ॐ श्री दामोदराय नमः
ॐ श्री अच्युताय नमः
ॐ श्री सर्वदर्शनाय नमः
ॐ श्री वासुदेवाय नमः
ॐ श्री पुण्डरीक्षाय नमः
ॐ श्री नर-नारायणा नमः
ॐ श्री जनार्दनाय नमः



ॐ श्री चतुर्भुजाय नमः
ॐ श्री भगवते नमः
ॐ श्री उपेन्द्राय नमः
ॐ श्री परमेश्वराय नमः
ॐ श्री सर्वेश्वराय नमः
ॐ श्री धर्माध्यक्षाय नमः
ॐ श्री प्रजापतये नमः
ॐ श्री प्रकटाय नमः
ॐ श्री वयासाय नमः
ॐ श्री हंसाय नमः
ॐ श्री वामनाय नमः
ॐ श्री गगनसदृश्यमाय नमः
ॐ श्री लक्ष्मीकान्ताजाय नमः
ॐ श्री प्रभवे नमः
ॐ श्री गरुडध्वजाय नमः
ॐ श्री परमधार्मिकाय नमः
ॐ श्री यशोदानन्दनयाय नमः
ॐ श्री विराटपुरुषाय नमः
ॐ श्री अक्रूराय नमः
ॐ श्री सुलोचनाय नमः
ॐ श्री भक्तवत्सलाय नमः
ॐ श्री विशुद्धात्मने नम :
ॐ श्री श्रीपतये नमः
ॐ श्री आनन्दाय नमः
ॐ श्री कमलापतये नमः
ॐ श्री सिद्ध संकल्पयाय नमः
ॐ श्री प्रीतिवर्धनाय नमः
ॐ श्री केश्वाय नमः
ॐ श्री धनंजाय नमः
ॐ श्री ब्राह्मणप्रियाय नमः
ॐ श्री शान्तिदाय नमः
ॐ श्री श्रीरघुनाथाय नमः
ॐ श्री वाराहय नमः
ॐ श्री नरसिंहाय नमः
ॐ श्री रामाय नमः
ॐ श्री शोकनाशनाय नमः
ॐ श्री श्रीहरये नमः
ॐ श्री गोपतये नमः
ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः
ॐ श्री हृषीकेशाय नमः
ॐ श्री महाबलाय नमः
ॐ श्री लोकाध्यक्षाय नमः
ॐ श्री सुरेशाय नमः
ॐ श्री ईश्वराय नमः
ॐ श्री विराट पुरुषाय नमः
ॐ श्री क्षेत्र क्षेत्राज्ञाय नमः
ॐ श्री चक्रगदाधराय नमः
ॐ श्री योगिनेय नमः
ॐ श्री दयानिधि नमः
ॐ श्री लोकाध्यक्षाय नमः
ॐ श्री जरा-मरण-वर्जिताय नमः
ॐ श्री कमलनयनाय नमः
ॐ श्री शंख भृते नमः
ॐ श्री दु:स्वपननाशनाय नमः
ॐ श्री प्रीतिवर्धनाय नमः
ॐ श्री हयग्रीवाय नमः
ॐ श्री कपिलेश्वराय नमः
ॐ श्री महीधराय नमः
ॐ श्री द्वारकानाथाय नमः
ॐ श्री सर्वयज्ञफलप्रदाय नमः
ॐ श्री सप्तवाहनाय नमः
ॐ श्री श्री यदुश्रेष्ठाय नमः
ॐ श्री चतुर्मूर्तये नमः
ॐ श्री सर्वतोमुखाय नमः
ॐ श्री लोकनाथाय नमः
ॐ श्री वंशवर्धनाय नमः
ॐ श्री एकपदे नमः
ॐ श्री धनुर्धराय नमः

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