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Chaturthi 2024 July Date: जुलाई महीने में कब-कब पड़ेगी चतुर्थी तिथि,क्या है इन तिथियों का महत्व

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Wed, 26 Jun 2024 03:21 PM IST
सार

Chaturthi 2024 July Date: जैसा की आप जानते हैं जुलाई महीना शुरु होने वाला है। इस महीने में बहुत त्योहार और व्रत पड़ते हैं आज के इस लेख में हम आपको जुलाई महीने में पड़ने वाले चतुर्थी व्रत के बारे में बताएंगे।

चतुर्थी
चतुर्थी- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Chaturthi 2024 July Date: जैसा की आप जानते हैं जुलाई महीना शुरु होने वाला है। इस महीने में बहुत त्योहार और व्रत पड़ते हैं आज के इस लेख में हम आपको जुलाई महीने में पड़ने वाले चतुर्थी व्रत के बारे में बताएंगे। आपको बता दें हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर व्रत किया जाता है। चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इस व्रत को करने से जीवन के सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में खुशियों का आगमन होता है । चलिए आपको जुलाई महीने कितनी चतुर्थी पड़ेगी और कब- कब पड़ेगी इसके बारे में बताते हैं। और इस दिन क्या शुभ मुहूर्त रहेगा ये भी जानते हैं 
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इस साल कब है विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2024 Date )


पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि सुबह 06:08 बजे से शुरू होगी। वहीं, इसका समापन अगले दिन 10 जुलाई को सुबह 07:51 बजे होगा। इस दिन चंद्रोदय का समय रात 09:58 बजे है। साधक 09 जुलाई को व्रत रख सकते हैं।

इस साल कब है गजानन चतुर्थी (Gajanan Sankashti Chaturthi 2024 Date)

सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 24 जुलाई को सुबह 07:30 बजे से शुरू होगी और अगले दिन यानी 25 जुलाई को तिथि का समापन सुबह 04:39 बजे होगा। ऐसे में गजानन संकष्टी चतुर्थी 25 जुलाई को मनाई जाएगी।
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पूजा के दौरान किन मंत्रों का करें जप (Lord Ganesh Mantra)


गणेश गायत्री मंत्र

ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥

ॐ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥

ॐ गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥

धन लाभ हेतु मंत्र

ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।

गणेश मंत्र

ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।

निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥


गणेश आरती 

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

'सूर' श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो,
जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

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