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Bhramand kya hai: ब्रह्माण्ड क्या है ? ब्रह्मण्ड का अर्थ क्या है ? इसका निर्माण कैसे हुआ ?

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Sun, 30 Jun 2024 05:06 AM IST
सार

Bhramand kya hai: शुरू में कुछ नहीं था। केवल परब्रह्म था। उसका ना कोई आदि था और ना कोई अंत था। उसका कोई आकार नहीं था लेकिन वह निराकार भी नहीं था। उसमें कोई गुण नहीं था लेकिन वह गुणों से रहित भी नहीं था

ब्रह्माण्ड क्या है
ब्रह्माण्ड क्या है- फोटो : jeevanjali

विस्तार


Bhramand kya hai: शुरू में कुछ नहीं था। केवल परब्रह्म था। उसका ना कोई आदि था और ना कोई अंत था। उसका कोई आकार नहीं था लेकिन वह निराकार भी नहीं था। उसमें कोई गुण नहीं था लेकिन वह गुणों से रहित भी नहीं था। जब उस परब्रह्म की इच्छा हुई तो इस भौतिक ब्रह्माण्ड का निर्माण कार्य शुरू हुआ। उस परब्रह्म की इच्छा से एक ध्वनि उत्पन्न हुई जिसे ॐ कहा गया। 
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संसार की सभी ध्वनि इस ॐ में समाहित है। सबसे पहले जिस मूल तत्व का निर्माण हुआ उससे 3 तत्व पैदा हुए। रजोगुण, सतोगुण और तमोगुण। सत्व गुण यानी कि जो संरक्षण कर सके, रजोगुण यानी कि जो क्रिया में निपुण हो और तमोगुण यानी कि जो संहार कर सके। इन्ही 3 गुणों के प्रभाव से उस परबह्म ने पंचभूत का निर्माण किया। 

वायु, जल, अग्नि, पृथ्वी और आकाश ये 5 तत्व है और ये उस परमब्रह्म की शक्ति कही गई। इसके बाद पांच इन्द्रियाँ और पांच ही ज्ञान इन्द्रियाँ अस्तित्व में आई। इसे मन संचालित करता है। शुरू में सिर्फ जल था। जहां देखो वहां जल ही दिखाई देता था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं था जो कि जल में डूब जाता। इसके बाद उस परमब्रह्म ने स्वयं एक दिव्य रूप धारण किया और उस जल में कमल दल बनकर प्रवेश किया। जाल को नार और निवास को अयन कहते है इसलिए उस दिव्य पुरुष को नारायण कहा गया। 
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फिर उस ब्रह्म ने अपना अंश जल में प्रत्यारोपित किया। जल से उसका पालन हुआ और उसने एक अंड का निर्माण कर दिया। यह एक ऐसा सुनहरा अंडा था जो चमक रहा था। चूँकि इसे खुद ब्रह्म ने पैदा किया इसलिए यह ब्रह्माण्ड कहलाया। इसके बाद उसी दिव्य पुरुष ने विष्णु बनकर उस अंड में प्रवेश किया। रक्षा करने के कारण विष्णु को सत्व गुण का संरक्षक माना गया। उस अंड ने विष्णु को गर्भ की तरह ढक लिया, ठीक उसी प्रकार जैसे स्त्री अपने गर्भ को उदर में ढक लेती है और उसका पालन करती है। 

चूंकि उस अंड ने विष्णु को धारण किया इसलिए उसका नाम हिरण्यगर्भ हुआ। इसके बाद विष्णु की नाभि से 14 पंखुड़ी वाला कमल पुष्प निकला और उससे ब्रह्म प्रकट हुए। वो सृष्टि की रचना करने वाले थे इसलिए उनको रजो गुण का संरक्षक बनाया गया। नाभि से उत्पन्न कमल से ब्रह्मा का जन्म हुआ इसलिए उनको नाभिज कहा गया। उस हिरण्यगर्भ के भीतर एक वर्ष तक रहने के बाद ब्रह्मा जी ने उस अंड को दो हिस्सों में बाँट दिया। इसके ऊपर का आधा हिस्सा स्वर्ग था और नीचे का हिस्सा पृथ्वी थी। बीच में आकाश व्याप्त था। 

अंधकार से भरे हुए आकाश में अब ब्रह्माण्ड अस्तित्व में आने लगा। इसके बाद ब्रह्माण्ड को ब्रह्मा जी निहारने लगे।
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