विज्ञापन
Home  dharm  ashadh amavasya 2024 know ashadhi month date muhurta and fasting rule pitru tarpan

Ashadh Amavasya 2024: कब है आषाढ़ अमावस्या? जानें शुभ तिथि, महत्व और व्रत नियम

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Fri, 21 Jun 2024 10:50 AM IST
सार

Ashadh Amavasya2024: हर साल आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आषाढ़ अमावस्या मनाई जाती है। इस अमावस्या को आषाढ़ी अमावस्या या हलहारिणी अमावस्या भी कहा जाता है। इस साल आषाढ़ अमावस्या 5 जून को है।

Ashadh Amavasya2024
Ashadh Amavasya2024- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Ashadh Amavasya2024: हर साल आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आषाढ़ अमावस्या मनाई जाती है। इस अमावस्या को आषाढ़ी अमावस्या या हलहारिणी अमावस्या भी कहा जाता है। इस साल आषाढ़ अमावस्या 5 जून को है। हिंदू धर्म में आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन किसी पवित्र नदी, सरोवर में स्नान करने और पितरों के निमित्त दान-तर्पण करने का विधान है। मान्यता है कि ऐसा करने से आपके पितर प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। साथ ही पितरों के आशीर्वाद से मान-सम्मान में वृद्धि होती है। ऐसे में आइए जानते हैं आषाढ़ अमावस्या की तिथि, शुभ मुहूर्त और पितरों को प्रसन्न करने के उपाय...
विज्ञापन
विज्ञापन

आषाढ़ अमावस्या 2024 तिथि 

आषाढ़ अमावस्या 5 जुलाई शुक्रवार को है। इस दिन भगवान विष्णु और शिव की पूजा की जाएगी। इस बार आषाढ़ अमावस्या की तिथि 5 जुलाई शुक्रवार को सुबह 04:57 बजे शुरू होगी और 6 जुलाई को सुबह 4:26 बजे समाप्त होगी।

आषाढ़ अमावस्या की पूजा का महत्व

अमावस्या तिथि पर कई लोग अपने पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं। इस दिन पितृ तर्पण, नदी स्नान और दान आदि करना अधिक फलदायी माना जाता है। इतना ही नहीं, यह तिथि पितृ दोष से मुक्ति दिलाने में भी सहायक मानी जाती है। इसलिए यह तिथि पितृ कर्म के लिए बहुत शुभ मानी जाती है।
विज्ञापन

आषाढ़ अमावस्या पूजा विधि 

अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी में स्नान करें। उसके बाद सूर्योदय के समय भगवान सूर्यदेव को जल का अर्घ्य दें।आषाढ़ अमावस्या के दिन कर्मकांड के साथ अपने पितरों का तर्पण करें।पितरों की आत्मा की शांति के लिए व्रत रखें। जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें। इशके आलवा इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएं। 

आषाढ़ अमावस्या व्रत नियम

- आषाढ़ अमावस्या के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करें और सूर्य देव को जल अर्पित करें।
- इसके बाद गायत्री मंत्र का जाप करें, इससे मानसिक शांति मिलेगी।
- आषाढ़ अमावस्या के दिन पेड़-पौधे लगाने से शुभ फल मिलते हैं, इससे ग्रह दोष भी दूर होते हैं।
- अमावस्या तिथि पर पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
- आषाढ़ अमावस्या के दिन शिव मंदिर में पूजा करें, इससे कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।
- आषाढ़ अमावस्या पर दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं, वंश को सुखी जीवन का आशीर्वाद देते हैं।

पितृ गायत्री मंत्र

ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।
ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि। शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्।
ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:।

पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें ये काम

धार्मिक शास्त्रों में पूर्णिमा की तरह ही अमावस्या पर स्नान और दान का बहुत महत्व माना गया है। इसलिए आषाढ़ अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें।

इसके बाद पितरों की आत्मा की शांति के लिए इस दिन तर्पण करें। इसके अलावा अगर आपकी कुंडली में पितृ दोष है तो आषाढ़ अमावस्या पर यज्ञ करना चाहिए। इससे पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है।

 
विज्ञापन