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Ram Ji Ki Aarti: श्री राम चंद्र कृपालु भजमन ,पढ़ें श्री राम जी की आरती

jeevanjaliPublished by:
निधि
सार

Sri Ram ji ki Aarti: श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्। नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।। श्री राम जी की आरती का रोजाना पाठ करने से  भगवान राम आपने साधक से प्रसन्न होकर उस पर आपनी कृपा बनाए रखेंगे।

राम जी की आरती

Sri Ram ji ki Aarti:  हिंदू धर्म में कई त्योहार, जैसे की दशहरा, राम नवमी और दीपावली, पर भगवान राम (Sri Ram ji ki aarti) की पूजा की जाती है। भगवान राम को विष्णु का अवतार माना जाता हैं। हनुमान उनके परम भक्त हैं। उन्होंने लंका के राजा रावण का वध किया था। उनकी प्रतिष्ठा मर्यादा पुरूषोत्तम के रूप में है क्योंकि उन्होंने मर्यादा का पालन करने के लिए राज्य, मित्र, माता-पिता तक का त्याग कर दिया। 

राम जी की आरती

Sri Ram ji ki Aarti || भगवान राम की आरती


1
श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।

कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।

2

भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।

3

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।

मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।

4

एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।

जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।


दोहा- 
जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।

 

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