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Mangal Dosh Upay: मंगल दोष से हैं परेशान? तो करें ये उपाय

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Tue, 02 Jul 2024 11:44 AM IST
सार

Mangal Dosh Upay:  मंगलवार का दिन सनातन धर्म में हनुमान जी  को समर्पित है इस दिन विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा की जाती है। इस दिन मंगलवार का व्रत रखा जाता है। आपको बता दें कि बजरंगबली की पूजा करने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं ।

मंगल दोष उपाय
मंगल दोष उपाय- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Mangal Dosh Upay:  मंगलवार का दिन सनातन धर्म में हनुमान जी  को समर्पित है इस दिन विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा की जाती है। इस दिन मंगलवार का व्रत रखा जाता है। आपको बता दें कि बजरंगबली की पूजा करने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं । और साथ ही सारे प्रकार के दुख, संकट और भय से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा शत्रुओं का भी नाश होता है । इसके साथ ही जो भी व्यक्ति मंगल दोष से परेशान होता है उसे मंगलवार के दिन विधि-विधान से पूजा करना चाहिए।  ऐसा करने से धीरे-धीरे मंगलदोष से छुटकारा मिलने लगता है।  अगर आप भी मंगलदोष से परेशान हैं तो मंगलवार के दिन विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा करें और  इस मंगलकारी स्तोत्र का पाठ करें 
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शिव मंगला अष्टकम

भवाय चन्द्रचूडाय निर्गुणाय गुणात्मने ।

कालकालाय रुद्राय नीलग्रीवाय मङ्गलम् ॥

वृषारूढाय भीमाय व्याघ्रचर्माम्बराय च ।

पशूनां पतये तुभ्यं गौरीकान्ताय मङ्गलम् ॥

भस्मोद्धूलितदेहाय व्यालयज्ञोपवीतिने ।

रुद्राक्षमालाभूषाय व्योमकेशाय मङ्गलम् ॥

सूर्यचन्द्राग्निनेत्राय नमः कैलासवासिने ।

सच्चिदानन्दरूपाय प्रमथेशाय मङ्गलम् ॥

मृत्युंजयाय सांबाय सृष्टिस्थित्यन्तकारिणे ।

त्र्यंबकाय सुशान्ताय त्रिलोकेशाय मङ्गलम् ॥

गंगाधराय सोमाय नमो हरिहरात्मने ।

उग्राय त्रिपुरघ्नाय वामदेवाय मङ्गलम् ॥

सद्योजाताय शर्वाय दिव्यज्ञानप्रदायिने ।

ईशानाय नमस्तुभ्यं पञ्चवक्त्राय मङ्गलम् ॥

सदाशिवस्वरूपाय नमस्तत्पुरुषाय च ।

अघोराय च घोराय महादेवाय मङ्गलम् ॥

मङ्गलाष्टकमेतद्वै शंभोर्यः कीर्तयेद्दिने ।

तस्य मृत्युभयं नास्ति रोगपीडाभयं तथा ॥
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हनुमत् मंगलाष्टक

भास्वद्वानररूपाय वायुपुत्राय धीमते ।

अञ्जनीगर्भजाताय आञ्जनेयाय मङ्गलम् ॥

सूर्यशिष्याय शूराय सूर्यकोटिप्रकाशिने ।

सुरेन्द्रादिभिर्वन्द्याय आञ्जनेयाय मङ्गलम् ॥

रामसुग्रीवसन्धात्रे रामायार्पितचेतसे ।

रामनामैक निष्ठाय राममित्राय मङ्गलम् ॥

मनोजवेन गन्त्रे च समुद्रोल्लङ्घनाय च ।

मैनाकार्चितपादाय रामदूताय मङ्गलम् ॥

निर्जित सुरसायास्मै संहृतसिंहिकासवे ।

लङ्किणीगर्वभङ्गाय रामदूताय मङ्गलम् ॥

हृतलङ्केशगर्वाय लङ्कादहनकारिणे ।

सीताशोकविनाशाय रामदूताय मङ्गलम् ॥

भीभत्सरणरङ्गाय दुष्टदैत्य विनाशिने ।

रामलक्ष्मणवाहाय रामभृत्याय मङ्गलम् ॥

धृतसञ्जीवहस्ताय कृतलक्ष्मणजीविने ।

भृतलङ्कासुरार्ताय रामभटाय मङ्गलम् ॥

जानकीरामसन्धात्रे जानकीह्लादकारिणे ।

हृत्प्रतिष्ठितरामाय रामदासाय मङ्गलम् ॥

रम्ये धर्मपुरीक्षेत्रे नृसिंहस्य च मन्दिरे ।

विलसद् रामनिष्ठाय वायुपुत्राय मङ्गलम् ॥

गायन्तं राम रामेति भक्तं तं रक्षकाय च ।

श्री प्रसन्नाञ्जनेयाय वरदात्रे च मङ्गलम् ॥

विश्वलोकसुरक्षाय विश्वनाथनुताय च ।

श्रीप्रसन्नाञ्जनेयाय वरदात्रे च मङ्गलम् ॥
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